जिलाध्यक्ष बनने के बाद अजीत ने जिले में जिंदा की कांग्रेस
जिले में कांग्रेस को भूल चुकी थी जनता, धरना-प्रदर्शन कर कई मुद्दों का कराया निस्तारण

जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। जिले में लंबे समय से कमजोर पड़ी कांग्रेस को जिलाध्यक्ष अजीत यादव के नेतृत्व में नई ऊर्जा मिलने का दावा किया जा रहा है। एक समय ऐसा था जब जिले की राजनीति में कांग्रेस की सक्रियता काफी कम दिखाई देती थी और आम लोगों के बीच पार्टी का प्रभाव भी सीमित हो गया था। जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद अजीत यादव ने संगठन को सक्रिय करने के साथ ही जनसमस्याओं को लेकर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किए। इसके चलते पार्टी की गतिविधियां एक बार फिर लोगों के बीच नजर आने लगी हैं।
अजीत यादव के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने किसानों, बेरोजगारों, बिजली, सड़क, जलभराव और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर कई बार प्रशासन के सामने आवाज उठाई। धरना-प्रदर्शन के माध्यम से समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाने के साथ ही उनके निस्तारण की मांग की गई। पार्टी पदाधिकारियों का दावा है कि कई मामलों में प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए समस्याओं का समाधान भी कराया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लगातार जनहित के मुद्दे उठाने से संगठन का कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों से भी संपर्क बढ़ा है। गांवों और कस्बों में पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ी है। यही वजह है कि अब कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं में भी उत्साह दिखाई दे रहा है। समर्थकों की ओर से अजीत यादव को दोबारा जिलाध्यक्ष बनाए जाने की मांग उठने लगी है।
हालांकि कांग्रेस के नए जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर पार्टी स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि जिले में शासन की टीम द्वारा संगठन की स्थिति और नेताओं की सक्रियता को लेकर सर्वे किया जा रहा है। सर्वे में नेताओं की क्षेत्र में पकड़, संगठन के प्रति सक्रियता और जनाधार समेत विभिन्न पहलुओं को देखा जा रहा है। इसी रिपोर्ट के आधार पर जिलाध्यक्ष के चयन में निर्णय लिए जाने की चर्चा है।
जिलाध्यक्ष पद के लिए कई कांग्रेस नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर भी नए जिलाध्यक्ष को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब देखना होगा कि सर्वे और संगठन की गतिविधियों के आधार पर कांग्रेस नेतृत्व अजीत यादव पर दोबारा भरोसा जताता है या किसी नए चेहरे को जिले की कमान सौंपी जाती है। फिलहाल अजीत समर्थक उनके कार्यकाल को संगठन के लिए सक्रिय और प्रभावी बताते हुए उन्हें फिर जिलाध्यक्ष बनाए जाने की मांग कर रहे हैं।




