व्यवस्था बनाने बालों ने ही उजाड़ी व्यवस्थाएं
जागरण मोर्चा
पीलीभीत। जिले के मेडिकल कॉलेज की पुरुष विंग के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक अपने पद पर इस कदर अहंकार में है कि वह मरीजों के दर्द का एहसास तक नहीं करना चाहते। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर भी सीएमएस के आशीर्वाद से मरीजों के साथ बदसलूकी की कोई कसर नहीं छोड़ रहे। विकलांग को रूई और पट्टी पकड़ा कर यह कह दिया जाए कि खुद का इलाज खुद करो तो सोचिए इससे शर्मनाक और क्या ही होगा।
बीते दिन पूर्व हिंदू संगठन की ओर से सीएमएस पर लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी सीएमएस की गलती स्वीकार करते हुए शासन को उनके खिलाफ कार्यवाही का पत्र जारी कर दिया था। आज जब सरकारी अस्पताल की सुविधाओं की लाइव पड़ताल करी गई तो जो तस्वीरें सामने आई वह बेहद ही निराशाजनक रहीं। मौके पर न तो तय समय पर डॉक्टर पाए गए और न ही स्टाफ। इस दौरान एक विकलांग जिसका एक पैर 2 साल पहले एक हादसे में कट गया था वह व्हीलचेयर से इधर-उधर भटकता नजर आया। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने उसे रूई, पट्टी और दवाई देकर यह कह दिया कि अपना उपचार खुद कर लो। जहां एक ओर सरकारी अस्पताल के डॉक्टर के बैठने का समय 8 बजे है वहीं, 9.30 बजे तक अस्पताल के कमरे खाली रहे और बाहर मरीज डॉक्टर साहब का इंतजार करते रहे। जब इस प्रकरण पर सीएमएस रमाकांत सागर को फोन किया गया तो उनका कहना था कि विकलांग को 60 नम्बर कमरे में मेरे पास भेज दो। प्रश्न यही हैं कि वह व्यक्ति जिसका एक पैर नहीं है दूसरा पैर घायल है वह कैसे इन साहब के पास उनके कमरे तक पहुंच पाता। रूई और पट्टी थमाने वाले अस्पताल के कर्मियों को एक विकलांग पर इतना भी तरस नहीं आया कि उसे सही उपचार दे सकें। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य की कार्यशैली का तो यह आलम है वह किसी का फोन तक उठाना उचित नहीं समझती। 24 घंटे अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन का दावा करने वाले मेडिकल कॉलेज का हाल यह है कि वहां मौके पर डॉक्टर तक नहीं थे और करहाते मरीज बस डॉक्टर साहब का इंतजार कर रहे थे।
(वर्जन)
मै अभी इसको संज्ञान में लेता हूं, मै खुद हैरान हूं इस कदर अगर लापरवाही करी जा रही है, मरीज़ का उपचार होना ही चाहिए।
(ज्ञानेंद्र सिंह, जिलाधिकारी)
यह कृत्य तो बेहद ही शर्मनाक है, मैने सीएमएस पर कार्यवाही के लिए शासन को पत्र जारी कर दिया है, ड्यूटी के समय पर अगर डॉक्टर नहीं आ रहे तो कार्यवाही होनी चाहिए ( आलोक शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी)










