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कादरचौक में बिना पंजीकरण चल रहा गुनगुन अल्ट्रासाउंड सेंटर! लिंग जांच के आरोपों से उठे सवाल सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण नहीं होने का दावा, पीएनडीटी पंजीकरण और डॉक्टर की तैनाती पर भी सवाल

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कादरचौक में बिना पंजीकरण चल रहा गुनगुन अल्ट्रासाउंड सेंटर! लिंग जांच के आरोपों से उठे सवाल

सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण नहीं होने का दावा, पीएनडीटी पंजीकरण और डॉक्टर की तैनाती पर भी सवाल

इसी मकान में संचालित हो रहा है अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर
जागरण मोर्चा कार्यालय
कादरचौक। क्षेत्र में संचालित गुनगुन अल्ट्रासाउंड सेंटर को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि सेंटर बिना चिकित्सक और आवश्यक पंजीकरण के संचालित किया जा रहा है। सेंटर का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में पंजीकरण नहीं होने के साथ ही पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत अनिवार्य पंजीकरण भी नहीं होने का दावा किया जा रहा है। इन आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यहां किया जाता है अल्ट्रासाउंड व लिंग परीक्षण

 

आरोप है कि सेंटर पर बिना आवश्यक अनुमति के अल्ट्रासाउंड जांच की जा रही है। इसके अलावा, यहां भ्रूण के लिंग की जांच किए जाने की भी शिकायतें हैं। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह कानून का गंभीर उल्लंघन होगा। भारत में गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाने और लिंग चयन से संबंधित गतिविधियों पर पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत प्रतिबंध है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों और संस्थान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है।

मामले में सीएमओ कार्यालय के एक कर्मचारी के साथ कथित सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर के दस्तावेजों, चिकित्सक की उपलब्धता और जांच संबंधी गतिविधियों का औपचारिक सत्यापन किया है या नहीं।

जांच और कार्रवाई की उठी मांग

मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग से मांग की जा रही है कि गुनगुन अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण अभिलेखों, पीसीपीएनडीटी संबंधी अनुमति, चिकित्सक की नियुक्ति और अल्ट्रासाउंड मशीन के संचालन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, लिंग जांच के आरोपों की भी नियमानुसार जांच होनी चाहिए।

अब सवाल यह है कि यदि सेंटर बिना आवश्यक पंजीकरण के संचालित हो रहा है तो संबंधित विभाग की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी? स्वास्थ्य विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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