एचपीसीएल हत्याकांड: विभागीय जांच में इंस्पेक्टर और दरोगा की लापरवाही उजागर
जीएम की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई होती तो टल सकता था दोहरा हत्याकांड
आरोपी के मकान पर चला दिया गया था बुलडोजर
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। दातागंज क्षेत्र के सैजनी गांव स्थित एचपीसीएल बायो प्लांट में हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के मामले में पुलिस विभागीय जांच में तत्कालीन इंस्पेक्टर और दरोगा की लापरवाही सामने आई है। निलंबित इंस्पेक्टर अजय कुमार और दरोगा धर्मेंद्र कुमार पर लगाए गए लापरवाही के आरोप विभागीय जांच में सही पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ अब आगे की विभागीय कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
मामला 12 मार्च 2026 का है। सैजनी गांव स्थित एचपीसीएल बायो प्लांट में घुसकर महाप्रबंधक सुधीर कुमार गुप्ता और सहायक प्रबंधक हर्षद मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। एक ही स्थान पर दो अधिकारियों की हत्या से पुलिस महकमे के साथ ही पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। मामले में मुख्य आरोपी के रूप में जय प्रताप सिंह का नाम सामने आया था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
हत्याकांड की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना से पहले एचपीसीएल प्रबंधन और अधिकारियों की ओर से आरोपी अजय प्रताप सिंह के संबंध में पुलिस को शिकायतें और तहरीर दी गई थीं। इन शिकायतों में आरोपी की गतिविधियों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके बावजूद तत्कालीन इंस्पेक्टर अजय कुमार और दरोगा धर्मेंद्र कुमार ने शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया और समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
इसी बिंदु को विभागीय जांच में भी महत्वपूर्ण माना गया है। जांच अधिकारियों ने शिकायतों, उपलब्ध अभिलेखों और पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली की पड़ताल की। जांच में पाया गया कि आरोपी के खिलाफ मिली शिकायतों पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों के मुताबिक, यदि शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो संभव है कि बाद में हुई घटना को टाला जा सकता था।
विभागीय जांच रिपोर्ट में दोनों पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली को लापरवाहीपूर्ण माना गया है। आरोप है कि आरोपी के खिलाफ समय पर कार्रवाई न करना और शिकायतों को पर्याप्त महत्व नहीं देना हत्याकांड से पहले की महत्वपूर्ण चूक रही। जांच के बाद दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध माने गए हैं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस विभाग में दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभागीय स्तर पर जांच पूरी होने के बाद अब रिपोर्ट के परीक्षण और उसके आधार पर अगली कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। माना जा रहा है कि शासन स्तर पर भी रिपोर्ट की समीक्षा के बाद दोनों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई का फैसला लिया जा सकता है।
एचपीसीएल हत्याकांड ने पुलिस की कार्यप्रणाली और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े किए थे। अब विभागीय जांच में लापरवाही के आरोप सही पाए जाने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। सबसे अहम सवाल यही है कि यदि घटना से पहले मिली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता और आरोपी के खिलाफ समय रहते कार्रवाई होती, तो क्या दो अधिकारियों की जान बचाई जा सकती थी।





