तीन साल शासन के बेमिसाल,अलापुर बेकार
ईओ पर राजनीतिक संरक्षण के आरोप, जांच के बावजूद कार्रवाई नही
विकास कार्य ठप होने से जनता में रोष, चुनाव में भुगतना होगा परिणाम
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। जनपद के अलापुर नगर पंचायत में बीते तीन वर्षों से विकास कार्यों की रफ्तार थम सी गई है। जहां एक ओर शासन “तीन साल बेमिसाल” के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अलापुर की जमीनी हकीकत इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि नगर पंचायत में कार्यरत अधिशासी अधिकारी (ईओ) को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उनके खिलाफ शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
सूत्रों के अनुसार, नगर पंचायत में विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। साफ-सफाई, सड़क निर्माण, जल निकासी और प्रकाश व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं। कई वार्डों में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई है, जिससे गंदगी और जलभराव की समस्या बनी रहती है। वहीं, सड़कें जर्जर हालत में हैं और स्ट्रीट लाइटें भी कई जगहों पर खराब पड़ी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने पूर्व में ईओ की कार्यशैली की जांच के आदेश देते हुए एडीएम को जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे लोगों में यह संदेश जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले में उदासीनता बरती जा रही है।
नगर पंचायत अध्यक्ष का भी आरोप है कि उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके द्वारा उठाए गए विकास प्रस्तावों को नजरअंदाज किया जाता है। उनका कहना है कि जब भी वह किसी योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं, तो ईओ द्वारा उसमें बाधा उत्पन्न की जाती है। इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की गरिमा भी ठेस पहुंच रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आगामी चुनावों में इसका असर साफ देखने को मिलेगा। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि नगर पंचायत में विकास कार्यों को गति मिल सके।
वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर शासन और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो सरकार के विकास के दावे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे।
फिलहाल, आलापुर नगर पंचायत में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक निष्क्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि शासन और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या वाकई आलापुर की तस्वीर बदलने के लिए कोई ठोस पहल की जाती है या नहीं। इस नगर पंचायत के विकास कार्यों का मामला पूरे जिले में भाजपा को नासूर बन सकता है। अब तक जिले में तीन सीट भाजपा की थी, लेकिन आगे आने वाले समय में हो सकता है कि जिले से भाजपा गायब हो जाए। पूरे जिले में सपा का परचम लहर सकता है और इसका फायदा सपा के लोग उठना भी चाहते हैं।





