बेटी की सियासी राह के लिए धर्मेंद्र कश्यप ने दांव पर लगाई अपनी राजनीतिक जमीन!
भाजपा से इस्तीफे के बाद सपा में जाने का ऐलान, बिथरी चैनपुर से बेटी कीर्ति को विधायक बनाने की तैयारी; कई सवालों के जवाब बाकी
जागरण मोर्चा कार्यालय
देवेश मिश्रा
बदायूं। क्या बेटी को विधायक बनाने की महत्वाकांक्षा में पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी वर्षों की राजनीतिक जमीन दांव पर लगा दी है? भाजपा से इस्तीफा देने के बाद समाजवादी पार्टी में जाने के ऐलान ने जिले से लेकर बरेली तक की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि धर्मेंद्र कश्यप सपा में अपनी जगह बनाने के साथ बेटी कीर्ति कश्यप के लिए बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से टिकट हासिल करने में कितने कामयाब होते हैं।
धर्मेन्द्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप
धर्मेंद्र कश्यप आंवला लोकसभा सीट से दो बार भाजपा के सांसद रह चुके हैं। इससे पहले वह बसपा और समाजवादी पार्टी में भी विधायक तथा मंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक पारी खेल चुके हैं। अलग-अलग राजनीतिक दलों में काम करने का उनका अनुभव और कश्यप समाज में उनकी पकड़ उनकी सियासी ताकत मानी जाती है। हालांकि, दल बदलने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पुराने समर्थकों को एकजुट रखने और नए राजनीतिक समीकरणों में अपनी स्वीकार्यता साबित करने की होगी।
बेटी कीर्ति के लिए सपा से टिकट हासिल करना होगी बड़ी चुनौती
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि धर्मेंद्र कश्यप की नई राजनीतिक रणनीति के केंद्र में उनकी बेटी कीर्ति कश्यप हैं। बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से उन्हें चुनाव मैदान में उतारने की संभावनाओं को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, सपा की ओर से कीर्ति कश्यप की उम्मीदवारी को लेकर आधिकारिक घोषणा सामने आने तक इसे संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
सवाल यह भी है कि क्या समाजवादी पार्टी धर्मेंद्र कश्यप के राजनीतिक अनुभव और उनके प्रभाव को देखते हुए उनकी मांग को तवज्जो देगी? पार्टी में पहले से सक्रिय नेताओं और संभावित दावेदारों के बीच टिकट का समीकरण किस करवट बैठेगा, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
कश्यप वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाएंगे?
धर्मेंद्र कश्यप के सामने केवल टिकट हासिल करने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने समर्थक वर्ग को नए राजनीतिक खेमे के साथ जोड़ने की परीक्षा भी होगी। भाजपा में रहते हुए बने संपर्क और संगठनात्मक आधार को सपा के पक्ष में कितना बदला जा सकेगा, इसका आकलन चुनावी परिस्थितियों में ही हो पाएगा। कश्यप समाज के मतदाताओं का रुख भी इस पूरे घटनाक्रम को प्रभावित कर सकता है।
इसके साथ ही भाजपा से उनके इस्तीफे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या पार्टी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है? सपा में उनकी भूमिका क्या होगी? क्या बेटी कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर से टिकट दिलाने में वह सफल हो पाएंगे? और क्या उनके राजनीतिक फैसले से क्षेत्र के चुनावी समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आएगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में हैं। इतना जरूर है कि धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम पर बदायूं और बरेली मंडल की निगाहें लगी हुई हैं। बेटी को विधानसभा तक पहुंचाने की कोशिश उनके लिए राजनीतिक अवसर साबित होगी या पुराने जनाधार की अग्निपरीक्षा, यह आने वाला समय ही तय करेगा।
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पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप ने साफ तौर पर कहा कि वह बेटी को सपा के टिकट पर बिथरी से चुनाव लड़ाएंगे ही नहीं बल्कि विधयाक भी बनाने काम किया जाएगा।


पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप



