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भाई की आत्महत्या के मामले में एडीजी से गुहार, विवेचक पर रुपये मांगने का आरोप  चार हजार रुपये लेने का आरोप,10 हजार न देने पर नहीं की कार्रवाई

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भाई की आत्महत्या के मामले में एडीजी से गुहार, विवेचक पर रुपये मांगने का आरोप

 

चार हजार रुपये लेने का आरोप,10 हजार न देने पर नहीं की कार्रवाई

जागरण मोर्चा कार्यालय

सहसवान। थाना सहसवान क्षेत्र के गांव अलेहदादपुर धोबई निवासी ओमेन्द्र पुत्र राजवीर सिंह ने अपने छोटे भाई ज्ञानचन्द्र (23) की आत्महत्या के मामले में अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी), बरेली जोन को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित ने शिकायती पत्र के साथ वीडियो क्लिप भी उपलब्ध कराई है, जिसमें उसने मामले की विवेचना और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

 

ओमेन्द्र के मुताबिक, उसकी पत्नी प्रीति देवी कुछ दिन पहले नाराज होकर मायके चली गई थी। इसी बात को लेकर गांव के नरेश, रामबाबू, प्रमोद, रामस्वरूप उर्फ नन्हे, रुम सिंह, तालेवर पुत्रगण ओमप्रकाश और संतू पुत्रगण लालाराम ने उसकी पत्नी के गायब होने का शक उसके छोटे भाई ज्ञानचन्द्र पर जताया। आरोप है कि 20 अगस्त की रात करीब 10 बजे सभी लोग असलहों के साथ उसके घर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए ज्ञानचन्द्र को जान से मारने की धमकी दी।

 

पीड़ित का आरोप है कि धमकी से भयभीत ज्ञानचन्द्र अगले दिन 21 अगस्त को दोपहर करीब 12:30 बजे खेत पर गया और वहां बनी झोपड़ी की बुरजी में रस्सी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मामले में थाना सहसवान में 25 अगस्त को मु0अ0सं0 0429/2026 के तहत धारा 108 बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया।

 

गिरफ्तारी न होने और विवेचना पर उठाए सवाल

शिकायती पत्र में ओमेन्द्र ने आरोप लगाया है कि मुकदमा दर्ज होने के 12 दिन बाद भी सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई। उसका कहना है कि आरोपी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं और परिवार को धमका रहे हैं।

 

वीडियो में पीड़ित ने विवेचक पर मुकदमे में चालान करने के नाम पर 10 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। उसका दावा है कि इसमें से चार हजार रुपये लिए भी गए। साथ ही आरोप लगाया कि 21 सितंबर को नरेश और तालेवर को पकड़ा गया, लेकिन नरेश को जेल भेज दिया गया, जबकि तालेवर का धारा 170/126/135 बीएनएसएस के तहत एसडीएम सहसवान के समक्ष चालान कर छोड़ दिया गया।

 

पीड़ित परिवार ने एडीजी से मामले में एसएसपी बदायूं को निर्देशित कर सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी कराने और विवेचना निष्पक्ष अधिकारी से कराने की मांग की है। हालांकि, रुपये मांगने और विवेचना में लगाए गए अन्य आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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