शाक्य,लोध और कश्यप के जातिगत आंकड़ों में फंसी ब्रज क्षेत्र की राज्यसभा सीट
धर्मेंद्र कश्यप को राज्यसभा भेजकर बरेली मंडल की 15 कश्यप बाहुल्य विधानसभाओं पर भाजपा कर सकती हैं सोशल इंजीनियरिंग
शाक्य को प्रदेश कमेटी उपाध्यक्ष एवं लोधी को ब्रज क्षेत्र का अध्यक्ष पद देने के बाद कश्यप निषाद को साधने की तैयारी में भाजपा
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संगठनात्मक बदलावों के बीच अब राज्यसभा प्रतिनिधित्व को लेकर भी सामाजिक समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। ब्रज क्षेत्र की एक राज्यसभा सीट को लेकर पार्टी के भीतर संभावित नामों पर मंथन की चर्चाओं के बीच पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा में बताया जा रहा है। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
धर्मेंद्र कश्यप आंवला लोकसभा क्षेत्र से 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के नीरज मौर्य से हार का सामना करना पड़ा।
ऐसे में यदि भाजपा उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला करती है तो इसे उनके राजनीतिक अनुभव के साथ-साथ क्षेत्रीय सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा सकता है।
दरअसल, भाजपा ने जून 2026 में अपने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए दुर्विजय सिंह शाक्य को प्रदेश उपाध्यक्ष और पूरन लाल लोधी को ब्रज क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया था।
इससे ब्रज क्षेत्र के संगठन में पिछड़े वर्ग के अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व मिलने की तस्वीर बनी है। सितंबर में पूरन लाल लोधी की अगुवाई में घोषित ब्रज क्षेत्र की कार्यसमिति में भी विभिन्न सामाजिक समूहों को स्थान दिया गया।
इसी पृष्ठभूमि में कश्यप समाज के किसी बड़े चेहरे को प्रतिनिधित्व देने की चर्चा को 2027 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। बरेली मंडल और आसपास के इलाकों की कई विधानसभा सीटों में कश्यप-निषाद मतदाताओं की मौजूदगी को राजनीतिक दल महत्वपूर्ण मानते रहे हैं।
भाजपा की मौजूदा संगठनात्मक संरचना में शाक्य और लोधी समाज को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने के बाद कश्यप समाज को साधने की संभावित कवायद की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि ब्रज क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के विभिन्न सामाजिक समूहों का चुनावी प्रभाव अलग-अलग सीटों पर दिखाई देता है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि यदि धर्मेंद्र कश्यप को राज्यसभा भेजा जाता है तो उन्हें संगठन और चुनावी राजनीति में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। कश्यप-निषाद समाज के बीच उनकी स्वीकार्यता को भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में उपयोग करना चाहेगी या नहीं, यह पार्टी के अगले निर्णयों पर निर्भर करेगा।
बिथरी चैनपुर और शेखूपुर को लेकर भी चर्चाएं
इसी राजनीतिक चर्चा के साथ बिथरी चैनपुर और शेखूपुर विधानसभा क्षेत्रों को लेकर संभावित फेरबदल की बातें भी सामने आ रही हैं। चर्चा है कि किसी लोधी नेता को बिथरी चैनपुर से और शाक्य समाज के किसी चेहरे को शेखूपुर से मैदान में उतारने पर विचार हो सकता है। हालांकि, फिलहाल यह केवल राजनीतिक अटकलें हैं और भाजपा की ओर से किसी संभावित प्रत्याशी को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है।
बिथरी चैनपुर में 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. राघवेंद्र शर्मा विजयी रहे थे।
वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में आंवला से भाजपा प्रत्याशी रहे धर्मेंद्र कश्यप और सपा के नीरज मौर्य के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा था।
इस लिहाज से आने वाले महीनों में भाजपा के टिकट वितरण, संगठनात्मक नियुक्तियों और राज्यसभा के संभावित चेहरों पर होने वाले फैसले यह संकेत देंगे कि पार्टी ब्रज और रुहेलखंड में अलग-अलग पिछड़े सामाजिक समूहों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन किस तरह साधती है। अभी तक सामने आए फैसलों से शाक्य और लोधी समाज को संगठन में प्रमुख जिम्मेदारियां मिल चुकी हैं; कश्यप समाज से जुड़े किसी बड़े चेहरे को आगे लाने का फैसला होता है या नहीं, इस पर राजनीतिक निगाहें टिकी हैं।

धर्मेंद्र कश्यप


