बोर्ड बैठक में विकास की गाड़ी पर तेल के ब्रेक का बहाना
जागरण मोर्चा
पीलीभीत। दुनिया की नजरें इस वक्त ईरान और इजरायल के तनाव पर टिकी हैं और भारत में सरकार पूरी ताकत से जनता को आश्वस्त कर रही है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक मंचों से कह रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल की किल्लत महज एक ‘अफवाह’ है और लोग इस पर ध्यान न दें, लेकिन लगता है कि जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार तक सरकार का यह संदेश नहीं पहुंचा है, या फिर उन्होंने अपनी ही एक अलग समानांतर सरकार चला रखी है।
शनिवार को जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में जब सदस्यों ने स्ट्रीट लाइट न लगने का मुद्दा उठाते हुए ठेकेदार की लापरवाही पर सवाल किए, तो साहब ने ऐसा कुतर्क दिया कि सुनने वाले दंग रह गए। अधिकारी महोदय का कहना था कि जो गाड़ी स्ट्रीट लाइट लेकर आने वाली है, वह लखनऊ में फंसा हुआ है क्योंकि उसे रास्ते में आने के लिए डीजल नहीं मिल रहा। अब जनता इस अजीबोगरीब कशमकश में है कि वह किसे सच माने। एक तरफ मुख्यमंत्री का भरोसा है कि सब ठीक है, और दूसरी तरफ एक जिम्मेदार अधिकारी सरेआम बोर्ड बैठक में डीजल की किल्लत को विकास कार्यों में बाधा बता रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री की बातें सिर्फ दिलासा हैं, या फिर पीलीभीत के अधिकारी अपनी सुस्ती और ठेकेदारों की नाकामियों को छिपाने के लिए अंतरराष्ट्रीय संकट का इस्तेमाल ढाल की तरह कर रहे हैं।
हैरानी की बात है कि जो डीजल पूरे प्रदेश में सबको मिल रहा है, वो सिर्फ पीलीभीत की स्ट्रीट लाइट लाने वाले ट्रक को ही नसीब नहीं हो रहा, शायद विकास की रोशनी लखनऊ के किसी पेट्रोल पंप पर इसीलिए अटकी है ताकि अधिकारियों के पास बहाने बनाने का एक ‘ग्लोबल’ अवसर बना रहे।






