जागरण मोर्चा कार्यालय
पीलीभीत। मैं खाकी हूं…! वर्तमान पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव मिश्रा की यह पंक्तियां अपने आप में खाकी के स्वाभिमान का बखान करने के लिए पर्याप्त हैं। पर जब यही खाकीधारी चंद रुपयों में खाकी के ईमान को बेचकर इसकी छवि को धूमिल कर दें तो नागरिकों का विश्वास भी कहीं न कहीं डगमगाने लगता हैं। करीब छह माह पूर्व नौगवां पकड़िया निवासी होमगार्ड राजेंद्र पाल जो वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी पर तैनात है उसके व उसके अन्य परिवारजनों पर बीएनएस की गंभीर धाराओं में सुनगढ़ी थाने में मुकदमा पंजीकृत किया गया था।

होमगार्ड राजेंद्र

होमगार्ड राजेंद्र पाल के अनुसार मुकदमे की विवेचना कर रहे आसाम चौकी इंचार्ज रविन्द्र बालियान ने उसके व परिवार जनों के साथ अभद्रता की कोई सीमा ही नहीं छोlड़ी। आरोप है कि विवेचना अधिकारी ने जब राजेंद्र पाल थाने में बंद था तो उसकी पत्नी से धाराएं कम करने और मुकदमे में पंजीकृत महिलाओं के नाम निकालने के नाम पर खाकी का ईमान महज़ 54000 में बेच दिया। होमगार्ड की पत्नी ने अपने पति को बचाने के लिए अपने गहनों को गिरवी रख कर सुनगढ़ी थाने के बाहर खोके के पीछे दरोगा बालियान को तीस हजार रुपए नगद दिए। इस दौरान दरोगा ने होमगार्ड के बहनोई से भी 24000 रुपए नगद लिए। रिश्वत देने के बाद भी दरोगा ने न तो धाराएं कम करी और न ही मुकदमे से महिलाओं के नाम निकाले। होमगार्ड करीब ढाई महीने जेल में रहने के बाद जब जमानत पर बाहर आया तो उसने दरोगा से अपने रुपए वापिस मांगे। दरोगा ने न तो रुपए वापिस किए और उल्टा होमगार्ड का कहना है उसे बेइज्जत करके चौकी से ही भगा दिया। जब इस पूरे घटना क्रम पर चौकी इंचार्ज बालियान से उनका पक्ष पूछा गया तो उनका जवाब था कि मैं इस आरोप का खंडन करता हूं, इस चौकी पर ड्यूटी करके ऊब चुका हूं, मै खुद चाहता हूं मेरा यहां से तबादला कर दिया जाए। होमगार्ड ने दरोगा द्वारा ली गई इस रिश्वत की शिकायत पूर्व में थाना सुनगढ़ी में तैनात रहे थाना इंचार्ज पवन कुमार पांडे से भी करी थी। अब पुलिस महकमे से प्रश्न यही है कि क्या इस तरह ही यह वर्दी धारी खाकी के ईमान को बेचते रहेंगे? क्या थाने में बंद रहे होमगार्ड को केवल इस आधार पर न्याय नहीं मिलेगा कि वह जेल जा चुका है? शायद जिम्मेदार अफसर यह भूल रहे हैं पीड़ित की सुनवाई भी न्याय की श्रेणी में आती है।

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