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कशिश हत्याकांड में शासन तक पहुंची रिपोर्ट, डीएम ने मांगी हाई लेवल जांच समिति

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कशिश हत्याकांड में शासन तक पहुंची रिपोर्ट, डीएम ने मांगी हाई लेवल जांच समिति

 

एबीवीपी के दबाव में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुरक्षा समेत प्रमुख मांगें मानीं

 

 

जागरण मोर्चा कार्यालय

पीलीभीत। जिला अस्पताल के सीटी स्कैन कक्ष में पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल की नृशंस हत्या का मामला अब पूरी तरह शासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। घटना के चार दिन बाद जिला प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी है। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित घोष को भेजी रिपोर्ट में हत्या की घटना, पुलिस कार्रवाई, मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भूमिका, छात्रों के आरोप, सुरक्षा व्यवस्था की कमियां और घटनाक्रम के बाद उपजे आक्रोश का विस्तार से उल्लेख करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की सिफारिश की है। उधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के आंदोलन और ज्ञापन के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सहित प्रमुख मांगों पर सहमति जताते हुए जल्द अमल का भरोसा दिया है।

जिलाधिकारी की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि कशिश पटेल की हत्या के बाद मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल परिसर में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेज परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छात्रों ने सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश नियंत्रण प्रणाली, प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा, सुरक्षा गार्डों की संख्या तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण शिकायतें दर्ज कराई हैं। इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए बिना पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकती।

डीएम ने अपनी रिपोर्ट में शासन से आग्रह किया है कि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, ताकि यदि किसी स्तर पर लापरवाही, प्रशासनिक चूक या व्यवस्थागत खामी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना के बाद मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने लगातार प्रदर्शन कर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। छात्राओं ने कहा कि अस्पताल और कॉलेज परिसर में वे स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की नियमित तैनाती, अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी कैमरों की प्रभावी मॉनिटरिंग, छात्राओं के लिए सुरक्षित प्रशिक्षण व्यवस्था और प्रवेश व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की मांग रखी।

इसी बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, ने भी मामले को लेकर स्वशासी मेडिकल कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर छात्रा की हत्या, सुरक्षा व्यवस्था की खामियों और पैरामेडिकल छात्राओं की विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। परिषद ने आरोप लगाया कि छात्राओं से प्रैक्टिकल के नाम पर गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जाते हैं तथा छात्रावास, सुरक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था में भी कई कमियां हैं, जिनका तत्काल समाधान किया जाना चाहिए।

प्राचार्य ने परिषद के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता में ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगों पर सहमति व्यक्त करते हुए चरणबद्ध तरीके से उन्हें लागू कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, प्रशिक्षण प्रणाली में सुधार, छात्राओं की समस्याओं के समाधान तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम जल्द उठाए जाएंगे।

विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री रौनक पाल ने कहा कि परिषद हमेशा छात्र हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है। प्रशासन द्वारा मांगों को स्वीकार करना सकारात्मक पहल है, लेकिन यदि भविष्य में विद्यार्थियों की सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी हुई तो परिषद लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।जिला प्रमुख डॉ. गौरव वर्मा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में सुरक्षित, पारदर्शी और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। परिषद छात्र-छात्राओं के हितों और सुरक्षा से जुड़े हर मुद्दे पर लगातार नजर रखेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।कशिश पटेल हत्याकांड के बाद जहां एक ओर शासन स्तर पर जांच की तैयारी तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर छात्रों का दबाव और जनाक्रोश मेडिकल कॉलेज प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि शासन स्वतंत्र जांच समिति के गठन पर क्या निर्णय लेता है और दोषियों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।

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