प्रधानमंत्री आवास योजना में 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर दो सभासद समेत 22 लोगों पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश
अलापुर नगर पंचायत के एक वार्ड की रहने वाली है पीड़िता
अपर मुख्य न्यायायक मजिस्ट्रेट ने दिए मुकदमा दर्ज करने के आदेश
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लाभार्थी से 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने, रुपये न देने पर आवास निर्माण में बाधा डालने, मारपीट, अभद्रता, धमकी और छेड़छाड़ करने के आरोप में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय के आदेश पर अलापुर नगर पंचायत के दो सभासदों समेत 12 नामजद और 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला अलापुर नगर पंचायत के एक वार्ड में रहने वाली महिला से जुड़ा है। पीड़िता का आरोप है कि उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि योजना का लाभ मिलने के बाद नगर पंचायत के दो सभासदों ने आवास निर्माण कराने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की। जब उसने रिश्वत देने से इनकार कर दिया तो आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसके आवास का निर्माण नहीं होने दिया और लगातार बाधाएं उत्पन्न कीं।
पीड़िता का यह भी आरोप है कि विरोध करने पर आरोपियों ने उसके साथ अभद्रता की, मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी और छेड़छाड़ जैसी गंभीर घटनाओं को भी अंजाम दिया। घटना के बाद पीड़िता ने स्थानीय पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की, लेकिन पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। पुलिस स्तर पर सुनवाई न होने से परेशान महिला ने न्यायालय की शरण ली।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रस्तुत तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया। इसके बाद न्यायालय ने अलापुर थाना पुलिस को आदेश दिया कि दोनों सभासदों समेत 12 नामजद और 10 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध रिश्वत मांगने, मारपीट, अभद्रता, धमकी देने, छेड़छाड़ तथा अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना की जाए।
न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच करनी होगी। जांच के दौरान आरोपों की सत्यता, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार और लाभार्थियों के उत्पीड़न के आरोपों को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि योजना का लाभ दिलाने या निर्माण कार्य में रिश्वत की मांग की जाती है तो यह योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब सभी की निगाहें पुलिस विवेचना पर टिकी हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पीड़िता ने न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।




