3 माह के मासूम के पेट में पल रहा था दूसरा भ्रूण, दुर्लभ ऑपरेशन से बची जान
दूध पचाने में परेशानी और पेट में गांठ बनने पर जांच में हुआ खुलासा, ‘फीटस इन फीटू’ के दूसरे मामले ने डॉक्टरों को भी चौंकाया
जागरण मोर्चा कार्यालय
बरेली। शहर में चिकित्सा जगत का एक बेहद दुर्लभ मामला सामने आया है। शाहजहांपुर के तीन माह के मासूम के पेट में आठ सप्ताह का विकसित भ्रूण मिलने से डॉक्टर भी हैरान रह गए। बच्चे को लंबे समय से दूध पचाने में दिक्कत और पेट में सूजन की शिकायत थी। जांच के दौरान जब उसके पेट में असामान्य संरचना दिखाई दी तो चिकित्सकों ने ऑपरेशन का निर्णय लिया। करीब दो घंटे चली जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक भ्रूण को बाहर निकालकर मासूम की जान बचा ली। चिकित्सकों के अनुसार यह जन्मजात स्थिति ‘फीटस इन फीटू’ (Fetus in Fetu) कहलाती है, जो दुनिया में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। बरेली में इस तरह का यह दूसरा मामला बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार शाहजहांपुर जिले के कलान क्षेत्र निवासी किसान दुर्गेश और उनकी पत्नी राधा के तीन माह के बेटे को जन्म के कुछ समय बाद से ही दूध पचाने में परेशानी होने लगी थी। समय के साथ उसके पेट में सूजन बढ़ने लगी और एक गांठ भी महसूस होने लगी। परिजन पहले बच्चे को जांच के लिए एक निजी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच में लिवर के नीचे एक असामान्य संरचना दिखाई दी। विस्तृत जांच में पता चला कि उसके भीतर बाल, हड्डियां और अंगुलियों जैसी विकसित संरचनाएं मौजूद हैं। चिकित्सकों ने इसे ‘फीटस इन फीटू’ की स्थिति बताया, लेकिन ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद परिवार बच्चे को बरेली के रामपुर गार्डन स्थित एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा। यहां पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राजीव अग्रवाल ने सभी जांच रिपोर्टों का गहन अध्ययन करने के बाद सर्जरी करने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि करीब 13 वर्ष पहले भी उनके सामने ऐसा ही दुर्लभ मामला आया था, जिसके सफल अनुभव के आधार पर इस बार भी पूरी टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन की योजना बनाई।
करीब दो घंटे तक चले ऑपरेशन में बच्चे के पेट से लगभग 60 ग्राम वजन का भ्रूण निकाला गया। डॉक्टरों के मुताबिक भ्रूण एक सिस्ट के भीतर था, जिसमें करीब 200 मिलीलीटर द्रव्य भरा हुआ था। इसकी रक्त आपूर्ति बच्चे के लिवर से हो रही थी और यह लिवर, किडनी तथा आंतों से चिपका हुआ था। ऐसे में सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। चिकित्सकों ने बेहद सावधानी के साथ भ्रूण को अलग किया ताकि बच्चे के किसी भी महत्वपूर्ण अंग को नुकसान न पहुंचे। इस ऑपरेशन में डॉ. दीपक मिश्रा और डॉ. विवेक सक्सेना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सफल सर्जरी के बाद बच्चे की हालत पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार वह तेजी से स्वस्थ हो रहा है। बच्चे के नाना छोटेलाल ने पूरी चिकित्सकीय टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉक्टरों की वजह से मासूम को नया जीवन मिला है।
क्या है ‘फीटस इन फीटू’?
विशेषज्ञों के अनुसार ‘फीटस इन फीटू’ एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात चिकित्सीय स्थिति है। गर्भावस्था की शुरुआती अवस्था में जब जुड़वां भ्रूण विकसित होते हैं, तब कभी-कभी एक भ्रूण दूसरे भ्रूण के शरीर के अंदर समा जाता है। इसके बाद अंदर मौजूद भ्रूण का सामान्य विकास रुक जाता है, लेकिन उसके कुछ अंग जैसे बाल, हड्डियां और अंगुलियां विकसित होती रहती हैं। इसी कारण जांच के दौरान ऐसी संरचनाएं दिखाई देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति लगभग पांच लाख जन्मों में किसी एक बच्चे में देखने को मिलती है।





