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सीएमओ सरकारी काम में व्यस्त: रहनुमा अस्पताल को बचाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

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सीएमओ सरकारी काम में व्यस्त: रहनुमा अस्पताल को बचाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

 

नहीं बन सकी जांच टीम, कागजों में चल रहा खेल

 

रहनुमा अस्पताल में संचालित हो रहा था एनआरसी वार्ड

 

कागजों में तमाम डॉक्टर के नाम लेकिन मौके पर अप्रशिक्षित कर्मचारी करते आ रहे प्रसव

 

15 मार्च की शाम को भर्ती कराया गया था गर्भवती महिला को

 

सिविल लाइन थाना क्षेत्र के शेखूपुर गांव की रहने वाली थी मृतक प्रसूता

 

 

 

जागरण मोर्चा कार्यालय

 

बदायूं। सदर कोतवाली क्षेत्र के शेखूपुर रोड स्थित रहनुमा कॉसमॉस अस्पताल में हुई प्रसूता की मौत के बाद शासन ने मामले पर संज्ञा ले लिया है। डीजी हेल्थ ने सीएमओ को तलब किया है। वहीं सीएमओ सरकारी काम में व्यस्त होने की वजह से बाहर हैं लेकिन यहां मौजूद स्टाफ अधिकारी रहनुमा अस्पताल को बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। बुधवार को दिनभर इसका खेल चलता रहा। देर शाम तक इस खेल में अधिकारी व कर्मचारी लगे हुए दिखाई दिए। अस्पताल संचालक को आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही आपका अस्पताल खुलवा दिया जाएगा,जिससे अस्पताल संचालक के हौसले बुलंद हैं

 

 

कोतवाली थाना क्षेत्र के शेखूपुर रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में प्रसूता की मौत के बाद सोमवार सुबह को परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह परिजनों को शांत कराते हुए जांच का आश्वासन दिया। तीन दिन बाद भी आरोपी संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। वहीं विभाग ने भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की है। ओटी को सील कर इत श्री कर दी गई है, जबकि रहनुमा अस्पताल में एनआरसी वार्ड संचालित हो रहा था। जबकि इसकी कोई अनुमति विभाग से नहीं मिली है।

 

सिविल लाइन्स थाना क्षेत्र के शेखूपुर निवासी अमित ने 15 जुलाई को प्रसव पीड़ा होने पर अपनी 25 वर्षीय पत्नी सुमन को शेखूपुर रोड स्थित रहनुमा अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल संचालकों ने सुरक्षित प्रसव का भरोसा दिलाते हुए 30 से 40 हजार रुपये खर्च आने की बात कही थी। इसी भरोसे में आकर उन्होंने प्रसूता को अस्पताल में भर्ती करा दिया।

 

परिजनों का कहना है कि अस्पताल में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी है और अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा प्रसव कराया जाता है। रविवार को अचानक सुमन की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने उसे सही इलाज देने के बजाय लगातार इंजेक्शन लगाते रहे। हालत गंभीर होने के बावजूद किसी बड़े अस्पताल में रेफर नहीं किया गया, जिससे प्रसूता की रविवार रात को मौत हो गई।

 

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह अस्पताल लंबे समय से मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहा है और पहले भी कई प्रसूताओं व गर्भवतियों की यहां मौत हो चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अस्पताल संचालकों के हौसले बुलंद हैं।

 

हंगामे की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया। पुलिस ने परिजनों को मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन किसी तरह शांत हुए।

 

इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी नर्सिंग होमों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई अस्पताल बिना पर्याप्त सुविधाओं और योग्य डॉक्टरों के ही संचालित हो रहे हैं, जहां मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

 

फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बार-बार शिकायतों के बावजूद ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। परिजन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अस्पताल को सील करने की मांग कर रहे हैं।

 

वर्जन

 

सरकारी कार्य से आज बाहर हूं। अस्पताल की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। अगर टीम मौके पर नहीं गई है तो आज उनको भेजा जाएगा। जांच के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। इस तरह के कृत्य करने वाले अवैध अस्पताल व निजी नर्सिंग होम पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। किसी कीमत पर बक्सा नहीं जाएगा। विकास शर्मा, सीएमओ बदायूं

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