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बेसिक शिक्षा विभाग में गड़बड़ियों पर उठते रहे सवाल, नहीं सुधरे हालात 

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बेसिक शिक्षा विभाग में गड़बड़ियों पर उठते रहे सवाल, नहीं सुधरे हालात

 

केजीबीवी के खाद्यान्न भुगतान से लेकर शिक्षक तबादले और ईसीसीई भर्ती तक विवादों में रहा विभाग

 

जांच के नाम पर होती रही खानापूर्ति, नहीं सुधर रहे बीएसए कार्यालय के हालात

 

जागरण मोर्चा कार्यालय

 

देवेश मिश्रा

 

बदायूं। जिले का बेसिक शिक्षा विभाग लंबे समय से विभिन्न वित्तीय और प्रशासनिक मामलों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में खाद्यान्न की खपत, शिक्षक तबादले और तैनाती तथा ईसीसीई एजुकेटर भर्ती को लेकर समय-समय पर शिकायतें और आरोप सामने आते रहे हैं। इन मामलों में संबंधित पक्षों की ओर से जांच और कार्रवाई की मांग भी की गई।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में खाद्यान्न और अन्य मदों में खर्च को लेकर सामने आए एक मामले में आरोप लगाया गया कि जून में गर्मी की छुट्टियों के दौरान विद्यालय बंद होने के बावजूद कागजों में खाद्यान्न की खपत दर्शाई गई। शिकायत के अनुसार इस आधार पर करीब 20 लाख रुपये के भुगतान का मामला सामने आया। इस मामले को लेकर भाजपा नेताओं ने शिकायत की थी। बताया गया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिले के प्रभारी मंत्री की ओर से बेसिक शिक्षा मंत्री को पत्र भी भेजा गया।

 

इसी तरह शिक्षकों के तबादले और प्रभारी प्रधानाध्यापकों की तैनाती को लेकर भी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। आरोप लगाया गया कि शासन और न्यायालय के निर्देशों के विपरीत नियमों को दरकिनार कर बड़ी संख्या में शिक्षकों को विद्यालयों में इधर-उधर तैनाती दी गई। स्थानीय स्तर पर इस प्रकरण को ‘तबादला खेल’ के नाम से भी उठाया गया।

 

ईसीसीई एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया भी विवादों से अछूती नहीं रही। करीब तीन हजार अभ्यर्थियों से आवेदन लिए जाने के बाद चयन प्रक्रिया और अभ्यर्थियों को बुलाए जाने के तरीके पर सवाल उठाए गए। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि शासनादेश के अनुरूप मेरिट तैयार नहीं की गई और प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं हुआ। मामले को लेकर अभ्यर्थियों ने मुख्य विकास अधिकारी से शिकायत कर भर्ती प्रक्रिया रद्द करने की मांग की थी।

 

इन मामलों ने बेसिक शिक्षा विभाग की वित्तीय पारदर्शिता और भर्ती-तैनाती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि आरोपों की वास्तविकता संबंधित जांच और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकती है। भाजपा नेताओं की शिकायत के बावजूद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं किया गई, जबकि बीएसए कार्यालय के हालात और भी खराब होते जा रहे हैं।

 

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बीएसए पर जातिवाद के लग रहे आरोप

 

– बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन कुमार फिर एक बार सवालों के घेरे में आ गए हैं। अब उन पर जातिवाद के आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने ही जाति के लोगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष पटलों पर उन्हें खुली छूट दे दी है। इसके बाद बाबूओं ने चांदी काटनी शुरूकर दी।हालत यह है कि बिना पैसे के बाबू किसी का कोई काम नहीं कर रहे। जिले की जनता व इस विभाग से जो जुड़े लोग हैं वह परेशान हो रहे हैं। आखिर भाजपा सरकार में इस तरह की प्रक्रिया कब तक चलती रहेगी। जबकि 2027 विधानसभा चुनाव सर पर है। अगर व्यवस्था नहीं सुधरी तो इसका खामयाजा भाजपा को अवश्य भुगतना होगा।

 

वर्जन

 

जब से जिले का कार्यभार संभाला है तब से व्यवस्थाओं को सुधारने में लगे हुए हैं। पहले जो कुछ हुआ है उसको मैं नहीं कह सकता, लेकिन अब किसी प्रकार की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी। हर प्रकार की चीजों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ विभाग कार्यवाही की जाएगी। नवीन कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी बदायूं

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