सुखवीर एग्रो एनर्जी लिमिटेड फैक्ट्री ने भैंसी नदी को बना डाला बरसाती नाला
— नदी मे बहाया जा रहा फैक्ट्री का गंदा प्रदूषण वाला पानी,
— अधिकारियों की अनदेखी के चलते भैंसी नदी का मिटाया जा रहा नामोनिशान
भैसी नदी फैक्ट्री का प्रदूषित पानी नदी में डालने के कारण भारी संख्या में मछलियां मरी
जागरण मोर्चा
पुवायां (शाहजहांपुर)। भैंसी नदी के किनारे इनायतपुर गांव मे हाईवे के किनारेस्थापित सुखवीर एग्रो फैक्ट्री के प्रबंधन ने भैंसी नदी को बरसाती नाला बना डाला है। इसी कारण नदी सुख गई है, और जिला प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जिस से भैसी नदी का नामोनिशान मिटकर यह नदी सूखी नदी के रूप में तब्दील हो गई है, केवल बरसात के दिनों में ही अपनी नजर आता है ,ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से जांच कराकर नदी को कब्जा मुक्त कराने और फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्यवाही किए जाने की मांग की है।
फैक्ट्री निर्माण होने से पूर्व तक महर्षि नदी 12 महीना हमेशा जल प्रवाह बना रहता था
पुवायां के गांव इनायतपुर से होकर निकली भैंसी नदी की भूमि पर कुछ साल पहले स्थापित हुई सुखवीर एग्रो के प्रबंधन की नियत खराब हो गई थी। शुरुआत से सुखवीर एग्रो प्रबंध तंत्र ने नदी किनारे की जमीन को समतल करके अपने कब्जे मे ले लिया । फैक्ट्री प्रबंध तंत्र के इस कृत्य के बाद से धीरे धीरे भैसी नदी का अस्तित्व की समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। भैसी नदी मे बरसात के दिनो मे पानी की अबिरल धारा बहती थी, लेकिन आज वहां पर अचमन करने तक को भी जल नही मिल पाएगा। हां बरसात के दिनो मे फैक्ट्री से निकलने वाली गंदगी नाला का स्वरूप ले चुकी नदी से निकलती दिखाई जरूर देगी। नदी किनारे खेती किसानी करने वालो की माने तो नदी के दोनों ओर की भूमि को समतल कर कब्जा किया जा चुका है। जिससे नदी नाले के रूप में परिवर्तित हो चुकी है। क्षेत्रीय ग्रामीणो की माने तो फैक्ट्री से निकले दूषित पानी के नाले को नदी में डाल दिया गया है। नदी के भू भाग को फैक्ट्री से निकलने वाली राविश, कूड़ा, राखी आदि.डालकर उस पर गंदे पानी को बहाकर नदी को समतल हो जाने के आप लग रहे हैंl। क्षेत्र के किसानों ने इस अनैतिक कार्य की प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत भी की थी। लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई। अशरफ अली ने बताया कि शिकायत पर अधिकारियों की एक टीम ने स्थिति का निरीक्षण किया। और जांच की खाना पूरी की गई जब भी कोई शिकायत या मामला आता है ,तो उसके बाद भी कोई कार्यवाही नही हुई। अब सवाल है की हाईवे पर स्थित फैक्ट्री के सामने से राजनेता व अधिकारी निकलते रहते हैं, लेकिन उन्हें यह सब दिखाई नहीं देता है। शासन एक ओर नदियों की सफाई पर करोड़ों का बजट खर्च करने का दावा कर रही है। वहीं शासन के सेवक इस ओर से मुंह फेर रहे हैं। जबकि एनजीटी द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार नदी किनारे कोई फैक्ट्री नहीं होनी चाहिए औरफैक्ट्री का गंदा पानी फैक्ट्री परिसिर में ही रिसाइकल कराकर प्रयोग किया जाना चाहिए। परंतु यहां नदी को ही गंदे नाले का रूप दे दिया गया है। ग्रामीण बताते हैं कि प्रशासन फैक्ट्री प्रबंधन से मिला हुआ है। जिसके चलते कई बार शिकायतें करने के बाद भी हमारी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। राशिद अली ने बताया की फैक्ट्री द्वारा नदी में राखी व अपशिष्ट पदार्थ डालकर नदी को पाटकर कर उस पर कब्जा किया जा रहा है। फैक्ट्री द्वारा नदी में बहाए जा रहे गंदे पानी को पीने से कई पशुओं की मौत हो चुकी है। हनीफ ने बताया कि गंदे पानी को पीने से पशुओं की मौत होने के बाद फैक्ट्री प्रबंधन से पानी छोड़ने को मना किया गया फिर भी फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। गांव के ग्रामीणों का कहना है कि सुखबीर एग्रो प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फैक्ट्री से निकली राखी व गंदा पानी नदी में बहाया जा रहा है। जिससे फसलें सूख रही है प्रशासन सुनने को तैयार नहीं। ग्रमीणों ने जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए जांच कराकर समाधान की मांग की है।
— पर्यावरण प्रदूषण अधिकारी ने बताया कि फैक्ट्री में ईटीपी लगा हुआ है। निष्कासित जल सिंचाई हेतु प्रयोग किया जा रहा है। इसके उलट जब उनसे सवाल किया गया कि फिर यह गंदा पानी नदी में कहां से आ रहा है। इसके जवाब में उन्होंने बताया कि यदि ऐसा है। जांच कराकर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
— एसडीएम की भी सुनो…—
पुवाया के उप जिला अधिकारी सदानंद सरोजने बताया कि यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है जांच कराकर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।






