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जिले में चर्चाएं तेज:जातीय समीकरण साधने में जुटी भाजपा सरकार 

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जिले में चर्चाएं तेज:जातीय समीकरण साधने में जुटी भाजपा सरकार

मनोज मसीही

डीके भारद्वाज

जिले से मनोज मसीही वह डीके भारद्वाज को दर्जा राज्य मंत्री बनाने की बात आई सामने

 

जानकारों का कहना कि सरकार ब्राह्मण व एससी वर्ग को साधने का कर रही है प्रयास

 

सहसवान से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं डीके भारद्वाज

 

अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य रह चुके हैं मनोज मसीह

 

जागरण मोर्चा कार्यालय

 

बदायूं। जिले की सियासत इन दिनों नई चर्चाओं के केंद्र में है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि भाजपा सरकार आगामी चुनावों को देखते हुए जातीय समीकरण साधने में जुट गई है। इसी कड़ी में जिले से दो प्रमुख नाम—मनोज मसीही और डीके भारद्वाज—को दर्जा राज्य मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से यह खबर तेजी से फैल रही है।

 

जानकारों का मानना है कि सरकार सामाजिक संतुलन साधने के लिए ब्राह्मण और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग पर विशेष ध्यान दे रही है। डीके भारद्वाज जहां ब्राह्मण समाज से आते हैं और सहसवान विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं, वहीं मनोज मसीही का संबंध एससी वर्ग से माना जाता है। ऐसे में दोनों नेताओं को तवज्जो देना भाजपा की रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रदेश में भाजपा को विभिन्न वर्गों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। खासकर ब्राह्मण और दलित मतदाताओं को साधने के लिए पार्टी लगातार प्रयासरत है। डीके भारद्वाज का नाम सहसवान क्षेत्र में एक सक्रिय और मजबूत चेहरे के रूप में लिया जाता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी, जिससे उनका राजनीतिक कद और बढ़ा है।

 

वहीं, मनोज मसीही का राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी कम नहीं है। वह पहले अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य रह चुके हैं और संगठन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनका नाम एससी वर्ग के बीच एक मजबूत प्रतिनिधि के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में उन्हें दर्जा राज्य मंत्री बनाया जाना सरकार के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

 

जिले के राजनीतिक हलकों में इन चर्चाओं को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कुछ लोग इसे आगामी चुनावों की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं, तो कुछ इसे पार्टी के अंदरूनी संतुलन साधने की कवायद बता रहे हैं। हालांकि भाजपा के स्थानीय नेताओं ने इस विषय पर खुलकर कुछ भी कहने से परहेज किया है।

 

फिलहाल, जिले में इन संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि यह निर्णय होता है, तो निश्चित ही इसका असर जिले की राजनीति पर देखने को मिलेगा।

 

हेडिंग 2:

ब्राह्मण-एससी समीकरण पर फोकस, बदायूं में दो नेताओं को मिल सकता है राज्य मंत्री का दर्जा

 

बदायूं। आगामी चुनावी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भाजपा सरकार द्वारा सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की कवायद तेज कर दी गई है। जिले में इन दिनों यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि मनोज मसीही और डीके भारद्वाज को दर्जा राज्य मंत्री बनाया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर गहमागहमी बनी हुई है।

 

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा सरकार इस समय ब्राह्मण और अनुसूचित जाति वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। डीके भारद्वाज सहसवान विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और ब्राह्मण समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। वहीं मनोज मसीही पूर्व में अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य रह चुके हैं और उनका प्रभाव एससी वर्ग के बीच देखा जाता है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनावों में किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती और इसी कारण हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में जिले से इन दो नामों का सामने आना राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है। यह कदम न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश स्तर पर भी पार्टी को मजबूती दे सकता है।

 

डीके भारद्वाज की बात करें तो उन्होंने सहसवान क्षेत्र में अपनी सक्रियता के दम पर एक अलग पहचान बनाई है। चुनाव हारने के बावजूद उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर नहीं हुई है। दूसरी ओर मनोज मसीही ने संगठन और प्रशासनिक स्तर पर अपने अनुभव के जरिए खुद को साबित किया है। अल्पसंख्यक आयोग में उनकी भूमिका भी सराहनीय रही है।

 

हालांकि पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी इस पूरे मामले पर अभी चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन जिस तरह से चर्चाएं सामने आ रही हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में कोई बड़ा फैसला हो सकता है। जिले के राजनीतिक समीकरणों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

 

फिलहाल, जिले में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग सरकार के आधिकारिक ऐलान का इंतजार कर रहे हैं।

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