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ड्रग इंस्पेक्टर पर महीनादारी वसूली के आरोप, एक और वीडियो वायरल कादरचौक के जोरी नगला में बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलवाने का दावा

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ड्रग इंस्पेक्टर पर महीनादारी वसूली के आरोप, एक और वीडियो वायरल

 

कादरचौक के जोरी नगला में बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलवाने का दावा

 

लेट होने पर छापेमारी और 3.50 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप

 

पहले वायरल वीडियो में भी उठ चुके हैं सवाल, कार्रवाई न होने से क्षेत्र में चर्चा हुई आम

 

मेडिकल स्टोर संचालक हरिओम शाक्य

जागरण मोर्चा कार्यालय

कादरचौक। जिले में दवा कारोबार की निगरानी करने वाले ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश प्रसाद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर उनका एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मेडिकल स्टोर संचालकों से कथित तौर पर महीनादारी वसूली और बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर चलवाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वीडियो में किए जा रहे दावों ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की जागरण मोर्चा समाचार पत्र स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।

ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश कुमार

 

बताया जा रहा है कि मामला कादरचौक थाना क्षेत्र के जोरी नगला गांव का है। वायरल वीडियो और उससे जुड़े आरोपों के मुताबिक यहां एक मेडिकल स्टोर बिना वैध लाइसेंस के संचालित कराया जा रहा था। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक से हर महीने एक निश्चित रकम ली जाती थी और इसके एवज में दुकान के संचालन में कथित तौर पर सहूलियत दी जा रही थी। कुछ समय तक यह व्यवस्था चलती रही, लेकिन कथित महीनादारी की रकम देने में देरी होने पर मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर दी गई।

 

वीडियो में दावा किया जा रहा है कि छापेमारी के बाद मेडिकल स्टोर संचालक से करीब 3.50 लाख रुपये की रकम ली गई। करीब दो लाख रुपये की दवा सील कर दी गई। आरोप है कि रकम न देने अथवा भुगतान में देरी होने के कारण कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो में इन आरोपों को लेकर बातचीत का हवाला दिया जा रहा है। यदि वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह दवा दुकानों के निरीक्षण और लाइसेंस व्यवस्था की गंभीरता पर बड़ा सवाल होगा।

 

ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश प्रसाद को लेकर इससे पहले भी रिश्वत से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। उस वीडियो को लेकर भी विभागीय स्तर पर सवाल उठे थे। उस समय कथित तौर पर रिश्वत लेते दिखाई देने वाले व्यक्ति को रिटायर्ड कर्मचारी बताया गया था। अब दूसरा वीडियो सामने आने के बाद पूर्व मामले को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारियों के नाम पर इस तरह की वसूली हो रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच कराकर पूरी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जिले में बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं तो उनकी नियमित जांच क्यों नहीं हो रही। वहीं, यदि किसी दुकान के पास लाइसेंस नहीं है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से महीनादारी लेकर उसे चलने देने के आरोपों की भी जांच जरूरी है। दवा कारोबार सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा होने के कारण इस तरह के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

 

जिले में नकली और बिना लाइसेंस दवाओं की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी ड्रग विभाग की है। इसके लिए समय-समय पर मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण, दवाओं के नमूने लेने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की जाती है। ऐसे में वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि कई मेडिकल स्टोर संचालकों से कथित तौर पर हर महीने रकम वसूली जाती है।

 

कुछ दिन पहले सामने आए वीडियो के बाद भी अब तक स्पष्ट कार्रवाई न होने की बात भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। अब नया वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि मामले की जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि वीडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि वसूली हुई है तो रकम किसके माध्यम से ली गई।

 

हालांकि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश प्रसाद अथवा संबंधित विभाग का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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