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सैजनी एचपीसीएल दोहरे हत्या कांड के बाद अब गोवंशों की मौत से दातागंज विधानसभा क्षेत्र शर्मसार

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सैजनी एचपीसीएल दोहरे हत्या कांड के बाद अब गोवंशों की मौत से दातागंज विधानसभा क्षेत्र शर्मसार

 

सैजनी एचपीसीएल दोहरे हत्याकांड से अभिगांव गौशाला की दूरी करीब पांच किमी

 

 

अब गोवंशों की मौत को लेकर प्रशासनिक निगरानी पर सवाल

जागरण मोर्चा कार्यालय

 

बदायूं। दातागंज विधानसभा क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में सामने आई दो अलग-अलग गंभीर घटनाओं ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मूसाझाग क्षेत्र के सैजनी गांव स्थित एचपीसीएल के सीबीजी प्लांट में 12 मार्च को हुए दोहरे हत्याकांड के बाद अब म्याऊं ब्लॉक के अभिगांव स्थित गौशाला में बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत का मामला चर्चा में है। दोनों स्थानों के बीच दूरी करीब पांच किलोमीटर बताई जा रही है। सैजनी प्रकरण में पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

 

अभिगांव की गौशाला में गोवंशों की मौत का मामला सितंबर के अंतिम सप्ताह में सामने आया। ग्रामीणों और पशु प्रेमियों ने बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत के दावे किए। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में 100 से अधिक गोवंशों की मौत का दावा किया गया, जबकि प्रशासनिक जांच में अलग संख्या सामने आई। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने अभिगांव में 20 तथा ब्यौर में नौ गोवंशों की मौत की पुष्टि की थी और मौत की वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हाइपोथर्मिया यानी अत्यधिक ठंड बताई गई थी। वहीं ग्रामीणों की ओर से मौतों की संख्या अधिक होने के आरोप लगाए गए।

 

मामला बढ़ने के बाद प्रशासन ने जांच कराई और कार्रवाई भी शुरू हुई। अभिगांव की गौशाला का संचालन शारदा सेवा समिति द्वारा किए जाने की बात सामने आई। गोवंशों की मौत के मामले में संचालक और केयरटेकर के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ तथा केयरटेकर की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई।

 

घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मामला जिला स्तर से आगे बढ़कर शासन तक पहुंचा। दो अक्टूबर को पशुपालन विभाग के निदेशक ने अभिगांव पहुंचकर गौशाला का स्थलीय निरीक्षण किया और गोवंशों की संख्या, रखरखाव तथा उपलब्ध संसाधनों की जानकारी ली। इससे पहले प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी अभिगांव और ब्यौर की गौशालाओं का निरीक्षण कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

 

यहां सबसे बड़ा सवाल केवल मृत गोवंशों की संख्या का नहीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था का है। यदि गौशाला में पर्याप्त चारा, पानी, आश्रय, उपचार और बारिश से बचाव की व्यवस्था थी तो इतनी बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत की स्थिति कैसे बनी? और यदि व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं थीं तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की नियमित निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

दातागंज क्षेत्र में हुई इन घटनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो सकते हैं। विपक्षी दल प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा उठा रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारी तय होने की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

 

सैजनी और अभिगांव की घटनाएं एक-दूसरे से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं, ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। दोनों घटनाओं की प्रकृति भी अलग है। फिर भी एक ही क्षेत्र में कम समय के अंतराल में दो गंभीर मामले सामने आने के कारण क्षेत्रीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक चर्चा होना स्वाभाविक है।

 

गौवंश संरक्षण उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक नीति और प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में गौशालाओं में होने वाली मौतों पर केवल तत्काल सफाई या कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। स्थायी व्यवस्था के लिए क्षमता के अनुरूप गोवंशों की संख्या, चारा-पानी की उपलब्धता, शेड, चिकित्सा सुविधा, बारिश से बचाव और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी स्पष्ट करनी होगी।

 

अभिगांव प्रकरण ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि सरकारी निगरानी तंत्र जमीन पर कितना प्रभावी है। अब शासन स्तर की जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, संस्था या संचालक की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जवाबदेही तय होना इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण परिणाम होगा। वहीं यदि मौतें प्राकृतिक आपदा और अत्यधिक बारिश-ठंड के कारण हुईं, तो भी भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों की समीक्षा आवश्यक होगी।

 

फिलहाल अभिगांव प्रकरण जांच के दायरे में है। शासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौतों के वास्तविक कारण क्या थे और इसके लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है।

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