सीयूजी नंबर बंद, पर्सनल फोन उठाया तो पत्रकार की पहचान पर सवाल
गौरव प्रकरण में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
पक्ष जानने के लिए फोन करने पर थाना प्रभारी ने कहा- ‘मैं कैसे मान लूं कि आप पत्रकार हैं’
जागरण मोर्चा कार्यालय
आसफपुर। फैजगंज बेहटा थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहे विवाद के बीच पुलिस और मीडिया के बीच संवाद को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। गौरव शर्मा को थाने ले जाने और उसके बाद समझौते के लिए दबाव बनाए जाने के आरोपों पर पुलिस का पक्ष जानने के लिए संवाददाता ने थाना प्रभारी कपिल कुमार के सरकारी सीयूजी नंबर पर संपर्क किया, लेकिन नंबर बंद मिला। इसके बाद उनके व्यक्तिगत नंबर पर फोन किया गया।
फोन उठाने पर थाना प्रभारी ने संवाददाता का परिचय पूछा। परिचय देने पर कथित तौर पर उन्होंने कहा, “मैं कैसे मान लूं कि आप पत्रकार हैं? मैं आपको पत्रकार नहीं मानता, मुझसे आकर मिलना।” आरोप है कि खबर से संबंधित पुलिस का पक्ष बताने के बजाय बातचीत पत्रकार की पहचान को लेकर केंद्रित रही।
मामला वार्ड नंबर सात निवासी गौरव शर्मा की शिकायत से जुड़ा है। गौरव ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि दो अक्टूबर को सिपाही विनीत सिंह और हेड कांस्टेबल राजीव उसे वायरल तमंचे वाली फोटो के मामले में जबरन थाने ले गए। गौरव का कहना है कि वायरल फोटो में वह नहीं है। उसने पुलिसकर्मियों पर अभद्रता, मोबाइल चेक करने और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देने के आरोप भी लगाए हैं।
गौरव ने बाद में वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी उसके बाबा के घर पहुंचे और मामले को रफा-दफा करने के लिए समझौते का दबाव बनाया। उसका कहना है कि जब उसने कोई अपराध नहीं किया तो समझौता किस बात का करे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस से जवाब मांगने पर कई सवाल अनुत्तरित
मामले में सवाल उठ रहे हैं कि गौरव को थाने लाने का आधार क्या था और इसकी जीडी में क्या प्रविष्टि की गई। वायरल फोटो की जांच में पुलिस को क्या तथ्य मिले? क्या थाने अथवा पुलिस वाहन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराई गई है? क्या गौरव या उसके परिवार से समझौते के लिए किसी पुलिसकर्मी ने संपर्क किया?
इन सवालों पर थाना प्रभारी का स्पष्ट पक्ष जानने के लिए सरकारी सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया, लेकिन नंबर बंद मिला। व्यक्तिगत नंबर पर संपर्क के बाद भी विस्तृत जवाब नहीं मिल सका। पत्रकार की पहचान को लेकर थाना प्रभारी की कथित टिप्पणी से पुलिस और मीडिया के बीच संवाद के तरीके को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।
गौरव की शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। थाना प्रभारी या पुलिस विभाग की ओर से विस्तृत पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।




