गौशालाओं से एनजीओ की छुट्टी, अब विभागीय निगरानी में होगा संचालन
120 गोवंशों की मौत के बाद जिला पशु चिकित्साधिकारी ने लिया फैसला
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। जिले की गौशालाओं में लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाओं और करीब 120 गोवंशों की मौत के बाद पशुपालन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। जिला पशु चिकित्साधिकारी ने गौशालाओं के संचालन में लगे एनजीओ को हटाने का निर्णय लिया है। अब जिले की गौशालाओं का संचालन एनजीओ के माध्यम से नहीं कराया जाएगा। विभागीय स्तर से गौशालाओं की देखरेख और व्यवस्थाओं की निगरानी की जाएगी।
बारिश के दौरान जिले की कई गौशालाओं में गोवंशों की मौत के मामले सामने आए थे। कहीं क्षमता से अधिक गोवंश होने, तो कहीं टिनशेड और जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायतें मिलीं। चारे की उपलब्धता और बीमार गोवंशों के उपचार को लेकर भी सवाल उठे। अलग-अलग क्षेत्रों में हुई गोवंशों की मौत के बाद प्रशासन और पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए।
इसी के बाद जिला पशु चिकित्साधिकारी ने गौशालाओं के संचालन की व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया है। विभाग का मानना है कि गौशालाओं की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और गोवंशों के स्वास्थ्य पर सीधे नजर रखने से लापरवाही की गुंजाइश कम होगी। अब चारा, पानी, साफ-सफाई, शेड, जलनिकासी और बीमार गोवंशों के उपचार जैसी व्यवस्थाओं पर विभागीय स्तर से निगरानी की जाएगी।
बताया जा रहा है कि एनजीओ के माध्यम से संचालित गौशालाओं में सामने आई कमियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, गौशालाओं में पहले से मौजूद गोवंशों की संख्या और उनके रखरखाव की व्यवस्था को लेकर विभाग को विस्तृत कार्ययोजना तैयार करनी होगी। अधिकारियों की ओर से गौशालाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
गौशालाओं में हुई मौतों के बाद लिया गया यह निर्णय व्यवस्था में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि विभागीय निगरानी में गौशालाओं की व्यवस्थाओं में कितना सुधार आता है।




