विधायक के करीबी भाजपा नेता ने बदला पाला, पर्दे के पीछे ‘एक तीर से दो शिकार’ की चर्चा
बदायूं।
बदायूं की सियासत में इन दिनों एक विधायक और उनके करीबी नेता के पाला बदलने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में तैर रही हैं। चाय की दुकानों से लेकर सियासी चौपालों तक सवाल यही है कि यह महज राजनीतिक संयोग है या 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पहले से तैयार की गई कोई रणनीति?
चर्चा एक भाजपा विधायक से जुड़े उस नेता को लेकर है, जिसे विधायक का बेहद करीबी माना जाता रहा है। हाल ही में इस नेता ने भाजपा का दामन छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। सियासी चर्चा को इसलिए भी हवा मिल रही है कि उनके परिवार की दो महिलाएं वर्तमान में प्रशासक हैं और उन्हें यह जिम्मेदारी दिलाने में विधायक की भूमिका की बात कही जाती रही है। ऐसे में अचानक पाला बदलना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
2024 के बाद अब 2027 की बिसात?
राजनीतिक गलियारों में 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ी पुरानी चर्चाएं भी फिर गर्म हो गई हैं। उस दौरान आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह चर्चा रही थी कि संबंधित विधायक ने अपनी पार्टी के प्रत्याशी के बजाय सपा प्रत्याशी को अंदरखाने मदद पहुंचाई। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चर्चाओं का नया दौर शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि विधायक के करीबी नेता का सपा में जाना किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सियासी अटकलें यहां तक हैं कि आने वाले चुनाव में यही नेता उसी विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट के दावेदार बन सकते हैं।
अगर ऐसा होता है तो भाजपा विधायक और उनके करीबी के आमने-सामने चुनाव लड़ने की स्थिति बन सकती है। समर्थक इसे रणनीति बता रहे हैं तो विरोधी इसे सियासी चाल करार दे रहे हैं। हालांकि इन चर्चाओं के पीछे वास्तविकता कितनी है, यह फिलहाल साफ नहीं है। टिकट बंटवारे और चुनावी समीकरण सामने आने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।




