नीली बत्ती का रुतबा, साहिब नदारद! आखिर किसके इशारे पर शराब भट्टी के पास दौड़ रही थी ‘मजिस्ट्रेट’ की इनोवा?
मजिस्ट्रेट लिखी गाड़ी बनी ‘निजी ऐशगाह’: बोलेरो खराब होने पर एक दिन के लिए मिली वैकल्पिक इनोवा में घूम रहे थे बाहरी युवक
जागरण मोर्चा कार्यालय
पीलीभीत। सरकारी रसूख और लाल-नीली बत्ती का दुरुपयोग थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सदर तहसील का है, जहाँ ‘मजिस्ट्रेट’ लिखी एक सरकारी इनोवा गाड़ी का मर्यादाओं को ताक पर रखकर इस्तेमाल करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सदर तहसीलदार के लिए अनुबंधित बोलेरो गाड़ी खराब होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लाई गई UP32 GL 2796 नंबर की सफेद रंग की लग्जरी इनोवा अब तीखे सवालों के घेरे में है।
वाहन के शीशे पर धौंस जमाता मजिस्ट्रेट का बोर्ड लगा है और छत पर रुतबा चमकाती नीली बत्ती। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस गाड़ी का इस्तेमाल किसी जनता की सेवा या प्रशासनिक काम के लिए नहीं, बल्कि रसूखदारों की ‘सैर-सपाटे’ के लिए हो रहा था।
शराब भट्टी के पास लगी ‘मजिस्ट्रेट’ की गाड़ी, वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। वीडियो सड़ा गांव स्थित एक शराब भट्टी के पास का बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नीली बत्ती जलती हुई मजिस्ट्रेट की यह इनोवा शराब भट्टी के पास आकर रुकती है। उसमें कोई अधिकारी नहीं, बल्कि दो आम युवक ठाट से बैठते दिखाई देते हैं। सरकारी गाड़ी में साहिब की जगह बाहरी युवकों की यह ‘रईसी’ देख मौके पर मौजूद लोग भी दंग रह गए। सवाल उठने लगा है कि आखिर किसके रसूख पर सरकारी ईंधन फूंका जा रहा था और मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं?
सड़ा गांव में शराब भट्टी के पास प्रशासनिक मर्यादा को तार-तार करती खड़ी ‘मजिस्ट्रेट’ इनोवा। गाड़ी में अधिकारी गायब, बाहरी युवकों का कब्ज़ा।
बैकफुट पर प्रशासन, तहसीलदार बोले होगी कार्रवाई
मामला तूल पकड़ते ही प्रशासनिक अमला बैकफुट पर आ गया है। पूरे मामले पर सफाई देते हुए सदर तहसीलदार विदेह सिंह ने बताया कि उनकी नियमित सरकारी बोलेरो खराब हो गई थी, जिसके कारण यह इनोवा सिर्फ एक दिन के लिए वैकल्पिक तौर पर मंगवाई गई थी।
जब उनसे साहिब की गैरमौजूदगी में गाड़ी के इस ‘दुरुपयोग’ पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यदि चालक उनकी अनुपस्थिति में नीली बत्ती जलाकर गाड़ी को अनाधिकृत जगह पर लेकर गया है, तो मामले की जांच कराकर उसके खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: सिर्फ कागजी खानापूर्ति या नपेगा गुनहगार?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी वाहनों का इस तरह का दुरुपयोग सिर्फ एक ड्राइवर की मनमर्जी से मुमकिन है? या फिर साहिब की नाक के नीचे ही सत्ता और रसूख का यह खेल खेला जा रहा था? देखना यह होगा कि तहसीलदार का यह बयान सिर्फ मामले को शांत करने का एक ‘आधिकारिक स्पष्टीकरण’ बनकर रह जाता है, या फिर सरकारी साख को बट्टा लगाने वाले जिम्मेदार चालक और उन युवकों पर वास्तव में कोई कानूनी हंटर चलेगा। जनता की नजरें अब प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।





