नैनी जेल में वाटर वुमन ने रोपा शमी का पौधा, बंदियों को दिया सकारात्मक बदलाव का संदेश
‘हरित जेल अभियान’ के तहत जेल परिसर में पौधारोपण, बंदियों से किया आत्मचिंतन और सुधार का आह्वान
देश की जेलों में विकसित होंगी ‘पंचतत्व पौधशालाएं’, अब तक 61 लाख पौधे लगाने का दावा
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। पर्यावरण संरक्षण को सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने के उद्देश्य से वाटर वुमन शिप्रा ने सोमवार को प्रयागराज स्थित केंद्रीय कारागार नैनी में ‘हरित जेल अभियान’ के तहत शमी का पौधा रोपित किया। जेल अधीक्षक विजय विक्रम के साथ उन्होंने जेल परिसर में पौधारोपण किया। इसके बाद उन्होंने बंदियों से संवाद कर उन्हें आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और जीवन में सुधार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
वाटर वुमन शिप्रा ने कहा कि प्रकृति केवल पर्यावरण को ही नहीं बदलती, बल्कि मनुष्य की सोच और जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। इसी सोच के साथ ‘हरित जेल अभियान’ शुरू किया गया है। अभियान के तहत देश की विभिन्न जेलों में बंदियों के सहयोग से ‘पंचतत्व पौधशाला’ विकसित करने की योजना है। इन पौधशालाओं में तैयार किए गए पौधों को जेल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में रोपित कर हरित वातावरण विकसित किया जाएगा।
नैनी जेल में बंदियों से संवाद के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, मनुष्य अपनी सोच, संकल्प और कर्मों के माध्यम से बदलाव की शुरुआत कर सकता है। जेल में बिताए जा रहे समय को आत्मचिंतन और स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन का अवसर बनाया जाना चाहिए। प्रकृति से जुड़ाव इस बदलाव की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।
शिप्रा पर्यावरण और नदियों के संरक्षण के लिए लंबे समय से देशभर में पदयात्राएं कर रही हैं। वह नर्मदा, शिप्रा, गोमती, कैलाश मानसरोवर तथा अयोध्या से रामेश्वरम तक करीब 15 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर चुकी हैं। उनकी संस्था पंचतत्व के माध्यम से देश की प्रमुख नदियों और उनके आसपास के क्षेत्रों में अब तक 61 लाख पौधे लगाए और संरक्षित किए जाने की जानकारी दी गई।
‘हरित जेल अभियान’ के तहत वाटर वुमन इससे पहले गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और बदायूं की जेलों का भ्रमण कर बंदियों से संवाद कर चुकी हैं। अभियान के माध्यम से जेलों में पौधारोपण के साथ ही बंदियों को प्रकृति से जोड़कर सकारात्मक जीवन-दृष्टि विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसी क्रम में सोमवार को वह नैनी केंद्रीय कारागार पहुंचीं। शमी का पौधा रोपित करने के साथ उन्होंने बंदियों को प्रकृति संरक्षण और जीवन में सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया। जेल प्रशासन और बंदियों के सहयोग से आगे भी हरित गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।





