राशन कार्ड सत्यापन के नाम पर वसूली का आरोप
सचिव के निजी सहायक पर फर्जी हस्ताक्षर करने का भी दावा
जागरण मोर्चा कार्यालय
आसफपुर। विकास खंड आसफपुर की ग्राम पंचायत आसफपुर में राशन कार्ड के नए और संशोधित आवेदनों के सत्यापन के नाम पर कथित सुविधा शुल्क वसूले जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत सचिव के निजी सहायक द्वारा आवेदनों पर सचिव के फर्जी हस्ताक्षर कर सत्यापन किया जाता था। साथ ही आवेदकों से 50, 100 और 200 रुपये तक लिए जाते थे। मामले ने तूल पकड़ने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार राशन कार्ड बनवाने या उसमें संशोधन कराने के लिए आवेदन लेकर आने वाले लोगों से पहले सुविधा शुल्क मांगा जाता था। आरोप है कि रुपये नहीं देने पर काम टाल दिया जाता था। इससे गरीब और पात्र लाभार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
मामले में नया मोड़ तब आया जब ग्राम पंचायत सचिव अवधेश कुमार सागर ने बताया कि वह संबंधित दिन अवकाश पर थे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनका निजी सहायक उनके नाम से कथित फर्जी हस्ताक्षर कर रहा है और लोगों से रुपये वसूल रहा है। जानकारी मिलने के बाद संबंधित युवक को काम से हटा दिया गया है।
सचिव के इस बयान के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। यदि सचिव अवकाश पर थे तो राशन कार्ड के आवेदनों पर हस्ताक्षर किसने किए? सरकारी अभिलेखों का सत्यापन किसके निर्देश पर हुआ? यदि हस्ताक्षर फर्जी हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी आसफपुर राकेश कुमार निराला ने बताया कि अभी तक ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि शिकायत प्राप्त होती है या मामला संज्ञान में आता है तो उसकी जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि विकास खंड की कुछ अन्य ग्राम पंचायतों में भी सचिवों द्वारा निजी व्यक्तियों से सरकारी कार्य कराए जाने की चर्चा है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ग्राम पंचायत सचिवों को निजी सहायक रखने की अनुमति है? यदि है तो उसका क्या प्रावधान है और यदि नहीं, तो सरकारी कार्य निजी व्यक्तियों से क्यों कराए जा रहे हैं? साथ ही यदि राशन कार्ड सत्यापन के लिए कोई सरकारी शुल्क निर्धारित नहीं है, तो लोगों से सुविधा शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा था?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि आखिर सरकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किसने किए और कथित वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है।





