सेमरमई कांड में मानवाधिकार आयोग सख्त, एसएसपी से मांगा जवाब
पुलिस दबिश में साकिर की मौत पर एनएच आरसी का नोटिस, चार हफ्ते में रिपोर्ट तलब
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। बिनावर थाना क्षेत्र के सेमरमई गांव में गोकशों के सत्यापन के नाम पर की गई पुलिस दबिश के दौरान हुई साकिर की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत जवाब तलब किया है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव ने 18 सितंबर को इस मामले की शिकायत मानवाधिकार आयोग को भेजी थी। इस पर 21 जुलाई को आयोग की प्रियांक कानूनगो की पीठ ने सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की। आयोग ने एसएसपी को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच कर चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजीत यादव ने जारी बयान में कहा कि पुलिस उत्पीड़न किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में गोकशी रोकने के नाम पर बेगुनाहों को निशाना बनाया जा रहा है और फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
शिकायत के अनुसार, 15-16 सितंबर की रात करीब 12 बजे बिनावर पुलिस गोकशों के सत्यापन के लिए सेमरमई गांव पहुंची थी। इसी दौरान घर के बाहर सो रहे साकिर को पुलिस ने दौड़ाया, जिससे वह धान के खेत में गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। बताया गया कि साकिर के खिलाफ किसी भी थाने में कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था। वह मेहनत मजदूरी कर अपने तीन बच्चों का पालन-पोषण करता था। पत्नी के पहले ही निधन के कारण अब उसके तीनों बच्चे बेसहारा हो गए हैं।
अजीत यादव ने मानवाधिकार आयोग से मामले की न्यायिक जांच कराने, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने प्रदेश में गोकशों के सत्यापन के नाम पर हो रहे कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की भी मांग उठाई है।
उन्होंने आयोग की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि मृतक साकिर के परिवार को न्याय अवश्य मिलेगा।




