महिला अस्पताल में प्रसूता की मौत, सीएमओ बोले हमको जानकारी नहीं
निजी ब्लड बैंक से मंगाकर प्रसूता को चढ़ाया गया था ब्लड
अब तक निजी ब्लड बैंक की भी जांच नहीं,सीएमओ की व्यवस्थाओं पर सवाल
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। महिला अस्पताल में प्रसूता की मौत के 24 घंटे बाद भी सीएमओ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर सके हैं. यहां तक कि कोई जांच टीम तक नहीं बनाई गई। ऐसे में दोषी लोगों पर कार्रवाई कैसे हो सकती है
उझानी थाना क्षेत्र के मोहल्ला गद्दी टोला निवासी जहीर अहमद ने अपनी पत्नी शमा को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार सुबह करीब 5:00 बजे उझानी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती कराया था। जहां प्रसव के दौरान महिला की हालत बिगड़ी तो उसे बदायूं जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। दोपहर करीब ढाई बजे परिजन महिला को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने उसे भर्ती करने के बाद उपचार शुरू कर दिया। सामने आया है कि प्रसव के दौरान अधिक रक्तश्राव होने के कारण शरीर में ब्लड की कमी हो गई। डॉक्टर के कहने पर परिजनों ने ब्लड का इंतजाम किया। परिजन 5500 रुपये देकर निजी ब्लड बैंक से ब्लड लेकर आए, जिसको चढ़ाने के बाद प्रसूता की हालत और बिगड़ गई। महिला अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने हालत देखकर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। बताया जा रहा है कि परिजन उसे लेकर जा रहे थे कि रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के लोग महिला को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत की। इस मामले में सीएमओ डॉ. विकास शर्मा ने 24घंटे बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई तक नहीं की है। जानकारी लेने पर सीएमओ ने कहा कि इस तरह की जानकारी मेरे पास नहीं है न ही इस तरह की जानकारी मैं फोन पर देता हूं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीएमओ जैसे पद पर बैठकर इस तरह का बयान देना जिले के लोगों को कहीं न कहीं परेशान करने वाला है।
इंसेट
बिना रजिस्ट्रेशन नर्सिंग होम की भरमार, सीएमओ व्यवस्था बनाने में फेल
सरकारी अस्पतालों में भी दम तोड़ रहे मरीज, स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं।
जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे नर्सिंग होमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि इन पर नियंत्रण करने में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे ये नर्सिंग होम न केवल मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की साख पर भी बट्टा लगा रहे हैं।
स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों की जान सुरक्षित नहीं रह गई है। आए दिन इलाज में लापरवाही और संसाधनों की कमी के चलते मरीज दम तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ठोस कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। जब सीएमओ डॉ. विकास शर्मा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की जाती है तो वह स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी देने से बचते नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले का यह दुर्भाग्य रहा है कि वर्षों से यहां कोई दमदार सीएमओ नहीं मिला, जो स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त कर सके। नतीजतन, अव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
वहीं, जिले में फैल रहे संक्रामक रोगों को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता सामने आ रही है। डेंगू व मलेरिया जैसे संक्रमण के मामलों में वृद्धि हो रही है, लेकिन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ है। न तो प्रभावी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और न ही समय रहते रोकथाम के उपाय किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही से आम जनता में रोष बढ़ता जा रहा है। लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अवैध नर्सिंग होमों पर सख्त कार्रवाई की जाए, सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारी जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित इलाज मिल सके।





