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जहां जलना था श्रद्धा का दीप, वहां बारिश का डेरा है, मां के दरबार तक पानी पहुंचा, जिम्मेदारों का चेहरा अंधेरा है….

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जहां जलना था श्रद्धा का दीप, वहां बारिश का डेरा है, मां के दरबार तक पानी पहुंचा, जिम्मेदारों का चेहरा अंधेरा है….

 

आस्था की दहलीज तक पहुंचा बारिश का कहर, मां यशवंतरी देवी की गुफा में घुसा दो से तीन फीट पानी

 

शिकायतों के बावजूद नहीं चेता प्रशासन, महंत और सेवादारों ने खुद संभाली व्यवस्था, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जलभराव का वीडियो

 

 

जागरण मोर्चा कार्यालय

पीलीभीत। तराई के जनपद बांसुरी नगरी टाइगर रिजर्व पीलीभीत की विशेषता यूं तो तमाम चीजों से है लेकिन लाखों लोगों की श्रद्धा का केंद्र शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार मां यशवंतरी देवी मंदिर एक बार फिर बदहाल व्यवस्थाओं का शिकार बन गया। लगातार हो रही बारिश के बीच मंदिर परिसर ही नहीं, बल्कि मां की पवित्र गुफा तक बारिश का पानी पहुंच गया। गुफा में करीब दो से तीन फीट तक पानी भर जाने से श्रद्धालुओं की आस्था पर भी संकट खड़ा हो गया। दर्शन और पूजा-अर्चना बाधित रही, लेकिन जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बने रहे। आखिरकार मंदिर के महंत और सेवादारों ने खुद मोर्चा संभाला और घंटों की मशक्कत के बाद गुफा से पानी निकालकर हालात सामान्य किए। बताते चले कि जनपद पीलीभीत के आवास विकास क्षेत्र के निकट स्थित मां यशवंतरी देवी मंदिर शहर के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि चैत्र नवरात्र में लगने वाले मेले के दौरान हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ऐसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होना नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

लगातार कई दिनों से हो रही बारिश के कारण मंदिर परिसर में पानी भरना शुरू हुआ। देखते ही देखते पानी मुख्य प्रांगण से होते हुए मां की गुफा में पहुंच गया, जहां दो से तीन फीट तक जलभराव हो गया। हालात ऐसे हो गए कि कई श्रद्धालु गुफा तक पहुंच ही नहीं सके। कुछ लोगों को बिना दर्शन किए वापस लौटना पड़ा, जबकि जो पहुंचे उन्हें पानी से होकर गुजरना पड़ा।‌ वही मंदिर प्रशासन का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर वर्ष बरसात में मंदिर जलभराव की चपेट में आ जाता है। कुछ वर्ष पहले कॉलोनियों की ओर से आने वाले पानी की समस्या का समाधान किया गया था और मंदिर परिसर का चबूतरा भी ऊंचा कराया गया, लेकिन पशु चिकित्सालय की ओर से आने वाले नाले का रुख बदलने के बाद हालात और बिगड़ गए। अब बारिश का अधिकांश पानी सीधे मंदिर परिसर की ओर आ रहा है। मंदिर के महंत राजेश वाजपेयी ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय, नगर पालिका और आईजीआरएस पोर्टल पर कई बार शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। नगर पालिका की ओर से नाला निर्माण का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पारित कराने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन धरातल पर अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। परिणामस्वरूप हर बारिश में श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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जब प्रशासन नहीं पहुंचा, तो सेवादारों ने उठाई जिम्मेदारी

 

मंगलवार को जलभराव की स्थिति गंभीर होने पर मंदिर के महंत और सेवादार स्वयं पानी निकालने में जुट गए। घंटों तक मेहनत कर गुफा और मंदिर परिसर से पानी बाहर निकाला गया। इसके बाद साफ-सफाई कर दोबारा पूजा-अर्चना शुरू कराई गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते जल निकासी की व्यवस्था कर दी जाती, तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती। मंदिर परिसर में भरे पानी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोग नगर पालिका और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब शहर के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल की यह हालत है, तो आम क्षेत्रों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए और नाले का निर्माण जल्द कराया जाए, ताकि भविष्य में बरसात के दौरान मां के दरबार तक पानी न पहुंचे। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े इस स्थल को हर साल जलभराव के भरोसे छोड़ देना न तो उचित है और न ही स्वीकार्य। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार विभाग कागजी दावों से बाहर निकलकर जमीन पर समाधान दें।

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