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प्रमुख सचिव ने डीएम को दिए निर्देश, एक सप्ताह में ईओ की जांच रिपोर्ट मांगी अलापुर नगर पंचायत के ईओ त्रिवेंद्र कुमार की बढ़ गई मुश्किलें तीन साल में डीएम ने पास की कार्ययोजना, ईओ ने नहीं किए टेंडर

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प्रमुख सचिव ने डीएम को दिए निर्देश, एक सप्ताह में ईओ की जांच रिपोर्ट मांगी

अलापुर नगर पंचायत के ईओ त्रिवेंद्र कुमार की बढ़ गई मुश्किलें

तीन साल में डीएम ने पास की कार्ययोजना, ईओ ने नहीं किए टेंडर

शासन की प्रमुख योजनाओं को नहीं मिल पा रहा बल, ठप पड़े विकास कार्य

जागरण मोर्चा कार्यालय

अलापुर। नगर पंचायत अलापुर में विकास कार्यों में लापरवाही को लेकर अब प्रशासन सख्त हो गया है। शासन स्तर पर मामला पहुंचने के बाद प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) की कार्यप्रणाली की जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए। इस निर्देश के बाद नगर पंचायत प्रशासन में हड़कंप मच गया है, जबकि ईओ त्रिवेंद्र कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार नगर पंचायत अलापुर में बीते तीन वर्षों के दौरान विभिन्न विकास कार्यों के लिए कार्ययोजनाएं जिलाधिकारी स्तर से स्वीकृत की गई थीं। इन योजनाओं में सड़क निर्माण, नाली निर्माण, जल निकासी व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन स्वीकृत योजनाओं पर अमल करने के लिए अब तक टेंडर प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई।

सूत्रों का कहना है कि कई बार उच्चाधिकारियों द्वारा समीक्षा बैठकों में इन योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी मांगी गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इसके चलते शासन की प्राथमिकता वाली योजनाएं भी धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं। नगर क्षेत्र के कई वार्डों में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत में लंबे समय से विकास कार्यों की गति बेहद धीमी है। बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है, जबकि सड़कों की हालत भी खराब बनी हुई है। कई स्थानों पर नालियां अधूरी पड़ी हैं, जिससे गंदगी और बीमारियों का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाती तो अब तक अधिकांश कार्य पूरे हो चुके होते।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने इसे लापरवाही मानते हुए सीधे जिलाधिकारी से जवाब तलब किया है। प्रमुख सचिव द्वारा दिए गए निर्देश में साफ कहा गया है कि ईओ की भूमिका की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर तीन वर्षों में स्वीकृत योजनाओं पर कार्य क्यों नहीं हुआ। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं इसमें वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक उदासीनता तो नहीं रही।

जिलाधिकारी ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को जांच के निर्देश दे दिए हैं। बताया जा रहा है कि जांच टीम सभी स्वीकृत योजनाओं, उनके बजट, फाइलों और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल करेगी। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यदि जांच में लापरवाही या अनियमितता साबित होती है तो संबंधित ईओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। इसमें निलंबन से लेकर विभागीय कार्यवाही तक के विकल्प शामिल हैं।

इस पूरे प्रकरण ने नगर पंचायतों में कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन की मंशा है कि विकास कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही के चलते योजनाएं कागजों तक सीमित रह जा रही हैं। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

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