बाढ़-कटान से सड़कों पर उतरा बेसहारा गोवंश, हाईवे पर मंडराया हादसों का खतरा
गंगा-रामगंगा के तटीय इलाकों से सुरक्षित ठिकानों की तलाश में निकले सैकड़ों पशु
किसानों की फसलें भी हो रहीं चौपट
गोशालाओं पर खर्च हो रहा करोड़ों का बजट, फिर भी हाईवे और खेत बने बेसहारा गोवंश का ठिकाना
देवेश मिश्रा
बदायूं। गंगा और रामगंगा नदी में आई बाढ़ और कटान ने तटीय इलाकों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निचले क्षेत्रों में पानी भरने के कारण सैकड़ों बेसहारा गोवंश सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की तलाश में सड़कों और हाईवे की ओर पहुंच गए हैं। बदायूं और आसपास के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह गोवंश के झुंड दिखाई दे रहे हैं। इससे जहां यातायात प्रभावित हो रहा है, वहीं तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक पशुओं के आने से हादसे का खतरा भी बढ़ गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से निकलकर गोवंश अब सड़कों, डिवाइडरों और किनारे के ऊंचे स्थानों पर डेरा जमाए हुए हैं। दिन में तो वाहन चालक किसी तरह इनसे बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। अंधेरे में सड़क पर बैठे या अचानक दौड़कर सामने आ जाने वाले पशुओं से टकराने का खतरा बना रहता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों के साथ ही तेज रफ्तार कार और बड़े वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है।
इन हाईवे पर सबसे ज्यादा खतरा
दिल्ली-बदायूं हाईवे, बरेली-मथुरा हाईवे, मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे, बदायूं-मेरठ हाईवे और बदायूं-पुवायां हाईवे समेत कई प्रमुख मार्गों पर गोवंश के झुंड देखे जा रहे हैं। कई स्थानों पर पशु सड़क के बीचोंबीच बैठ जाते हैं। इससे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और पीछे से आने वाले वाहनों के टकराने का खतरा भी बना रहता है।
खेतों में पहुंचकर फसलें भी कर रहे चौपट
बाढ़ से पहले ही किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। ऐसे में बेसहारा गोवंश बची-खुची फसलों के लिए भी संकट बन गए हैं। किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि एक तरफ बाढ़ और कटान ने फसल बर्बाद कर दी, वहीं दूसरी तरफ पशुओं के झुंड खेतों में घुसकर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
गोशालाओं के दावों पर भी उठ रहे सवाल
सरकार की ओर से गोवंश संरक्षण और गोशालाओं के संचालन पर बजट खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में बेसहारा पशुओं का सड़कों और खेतों में दिखाई देना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गोशालाओं में पर्याप्त क्षमता और व्यवस्थाएं हैं तो बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकलने वाले गोवंश को तत्काल सुरक्षित आश्रय क्यों नहीं दिया जा रहा है।
ग्रामीणों और वाहन चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर बेसहारा गोवंश को तत्काल सुरक्षित गोशालाओं में पहुंचाया जाए। साथ ही हाईवे के संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और पशुओं को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले समस्या का समाधान हो सके।




