शारदा नदी का कहर जारी, लाइव कटान देख दहशत में आए ग्रामीण
नदी की तेज धार आवादी और आप पास की ओर बढी
कटान देख दहशत में आए बाढ पीडित
जागरण मोर्चा, कार्यालय
पूरनपुर। क्षेत्र के गांव चंदिया हजारा में शारदा नदी का कटान लगातार जारी रहने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। नदी की तेज धार अब खेती की जमीन को काटते हुए आबादी और आसपास के इलाकों की ओर बढ़ रही है। कटान की रफ्तार को देखते हुए ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटान को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में कई घरों और आबादी वाले क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
शुक्रवार को नदी किनारे पेड़ के कटान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में शारदा नदी की तेज धार के कारण पेड़ के आसपास की जमीन तेजी से कटती हुई दिखाई दे रही है। नदी की धार जमीन को अपने साथ बहाकर ले जा रही है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में भय और बढ़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि नदी जिस तेजी से कटान कर रही है। उससे आने वाले समय में स्थिति और विकट हो सकती है।
ग्रामीणों के मुताबिक शारदा नदी के लगातार कटान के कारण बड़ी मात्रा में खेती योग्य जमीन नदी की धारा में समाती जा रही है। किसानों को अपनी फसलों और जमीन के नुकसान की चिंता सता रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर कटान इतना तेज है कि नदी की धार लगातार नए क्षेत्र को अपनी चपेट में ले रही है।
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि नदी का रुख इसी तरह आबादी की ओर बढ़ता रहा तो खेती की जमीन के बाद रिहायशी इलाकों पर भी खतरा मंडरा सकता है। इससे ग्रामीणों को अपने घरों और परिवारों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि शारदा नदी का कटान अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रह गया है। कई स्थानों पर नदी की धार आबादी के नजदीक पहुंचती जा रही है। ऐसे में ग्रामीण किसी बड़े नुकसान की आशंका से चिंतित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कटान प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति पर नियंत्रण करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने नदी के किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, संवेदनशील स्थानों पर कटान रोधी कार्य कराने और प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी किए जाने की मांग की है।




