Home Breaking News *शीशा हूं टूटने का इरादानहीं मेरा, लेकिन भरोसा हद से ज्यादा नहीं...

*शीशा हूं टूटने का इरादानहीं मेरा, लेकिन भरोसा हद से ज्यादा नहीं मेरा* -शेरम–महफ़िले सुख़न में रचनाकारों ने बाँधा समाँ

0
32

*शीशा हूं टूटने का इरादानहीं मेरा, लेकिन भरोसा हद से ज्यादा नहीं मेरा*

-शेरम–महफ़िले सुख़न में रचनाकारों ने बाँधा समाँ

जागरण मोर्चा कार्यालय

शाहजहाँपुर। शहर के साहित्यिक माहौल को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से युवा शायर इशरत सगीर के संयोजन में रविवार को कैंट स्थित एक कैफे में आयोजित ‘शेरम–महफ़िले सुख़न’ सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में शाहजहाँपुर के अलावा बीसलपुर, बरेली, हल्द्वानी सहित विभिन्न नगरों से आए शायरों, कवियों और साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की। ग़ज़लों, नज़्मों और काव्य-पाठ से सजी महफ़िल में देर तक दाद, वाह-वाही और तालियों की गूँज सुनाई देती रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञानेन्द्र मोहन ‘ज्ञान’ ने की। श्री ज्ञान ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं को अभिव्यक्ति देने का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन नई प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ हिंदी और उर्दू की साझा अदबी विरासत को सहेजने का कार्य भी करते हैं।

तिलहर के शायर शमशाद आतिफ़ ने पढ़ा-
शीशा हूं टूटने का इरादा नहीं मेरा।
लेकिन भरोसा हद से ज़्यादा नहीं मेरा।

बीसलपुर से पधारे वरिष्ठ शायर डॉ. राहिल फ़रीदी ने अपने प्रभावशाली कलाम से श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उनका यह शेर विशेष रूप से सराहा गया—
कई पसंद की चीजें हमारे हाथों से,
निकल गई हैं बहुत मोल भाव करने में।

हल्द्वानी से आए शायर डॉ. शान मिस्बाही ने अपनी ग़ज़ल से महफ़िल में अलग रंग बिखेरा। उन्होंने सुनाया—
आजा तू सरहाने तक।
बैठ मिरे मरजाने तक।
रोएंगे अहबाब फ़क़त,
मेरी लाश उठाने तक।

बरेली के युवा शायर आज़म ख़ान ने अपने अंदाज़-ए-बयाँ से श्रोताओं का दिल जीत लिया। उन्होंने पढ़ा—
हमेशा खौफ़ रहता है किसी के रूठ जाने का,
बड़ी मुश्किल से कोई इश्क़ का इज़हार करता है।

इसके अलावा वरिष्ठ शायर हमीद ख़िज़र, वरिष्ठ शायर असग़र यासिर, फ़हीम बिस्मिल, सैयद शारिक़ अक्स, इशरत सगीर, विकास सोनी ‘ऋतुराज’, साजिद सफ़दर, क़ासिम अख़्तर वारसी, इरफ़ान रूहानी, पुष्पेन्द्र पांचाल, ज़ीशान, संदीप राठौर सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से महफ़िल को यादगार बना दिया।

आयोजन को सफल बनाने में किस्से अनरिकॉर्डेड के
अजय सक्सेना, अमित देव, रिज़वान सग़ीर जुनैद ख़ान और कबीर ख़ान का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम का संचालन युवा शायर मुमताज़ इक़बाल ने किया तथा युवाकवि विकास सोनी ‘ऋतुराज ने सभी का आभार व्यक्त किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here