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सत्ता का संघर्ष : बगावत, वर्चस्व और वजूद की जंग मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, गोटियां बैठाने में जुटे जिले के माननीय

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सत्ता का संघर्ष : बगावत, वर्चस्व और वजूद की जंग
मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, गोटियां बैठाने में जुटे जिले के माननीय
बिछ चुकी है बदायूं की सियासी बिसात, बस चाल चलने की बारी
लखनऊ से बदायूं तक हलचल, गुप्त सर्वे ने उड़ाई माननीयों की नींद.
जागरण मोर्चा कार्यालय
देवेश मिश्रा
बदायूं । वरिष्ठ संवाददाता। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच मंत्रिमंडल विस्तार की खबरों ने बदायूं की सियासत में अंदरूनी भूचाल ला दिया है। जिले के माननीय इन दिनों क्षेत्र छोड़कर लखनऊ के चक्कर काट रहे हैं। एक तरफ जहां कुछ विधायक लाल बत्ती का सपना संजोए बड़े नेताओं से साठगांठ में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर गुप्त सर्वे की रिपोर्ट ने कई दिग्गजों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
बदायूं की छह विधानसभा सीटों का गणित फिलहाल सपा और भाजपा के बीच तीन-तीन की बराबरी पर टिका है। लेकिन असली रोमांच आगामी चुनाव के टिकट वितरण को लेकर है। चर्चा है कि भाजपा इस बार एंटी-इंकम्बेंसी को मात देने के लिए पुराने चेहरों को किनारे कर नए और युवा चेहरों पर दांव लगा सकती है।
हाल ही में हुए हिंदू सम्मेलनों के जरिए नेताओं ने जो शक्ति प्रदर्शन किया, वह केवल भीड़ जुटाना नहीं बल्कि आलाकमान को अपनी ताकत का एहसास कराना था। जिले में आरएसएस पृष्ठभूमि के सक्रिय नेताओं की दावेदारी ने मौजूदा विधायकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस बार जिले को प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री जैसा बड़ा पद मिल सकता है, जिससे जिले का कद और बढ़ जाएगा।
पार्टी के गुप्त सर्वे की रिपोर्ट अब मेज पर है। नेताओं का बार-बार लखनऊ जाना यह साफ इशारा कर रहा है कि कई सीटों पर तलवार लटक रही है। अब देखना यह होगा कि क्या पुराने दिग्गज अपनी कुर्सी बचा पाएंगे या नए दावेदार बाजी मार ले जाएंगे।
इंसेट
उपमुख्यमंत्री की रेस में जिले का नाम
बदायूं की सियासी बिसात पर इस बार दांव बहुत ऊंचे लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि चुनाव के बाद जिले को उपमुख्यमंत्री का पद मिल सकता है। दरअसल, बदायूं हमेशा से प्रदेश की राजनीति की धुरी रही है। यहां के समीकरण पूरे प्रदेश की राजनीति को प्रभावित करते हैं। इस संभावना ने स्थानीय दिग्गजों की महत्वाकांक्षाओं को पंख लगा दिए हैं।
संघ से जुड़ाव, बन सकता है चुनाव में बड़ा फैक्टर
बदायूं में आरएसएस की गहरी पैठ इस बार के टिकट वितरण में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। जिले के कई कद्दावर नेता संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और इस बार वे विधानसभा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालिया चुनावों में संघ के रणनीतिक कौशल को देखते हुए, पुराने विधायकों को डर है कि कहीं निष्ठा के आधार पर उनका पत्ता न कट जाए।
सर्वे में खुली दावों की पोल , लखनऊ पहुंची की रिपोर्ट
पार्टी आलाकमान द्वारा कराए गए गुप्त सर्वे ने माननीयों की नींद उड़ा दी है। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट में विधायकों के कामकाज, जनता के बीच उनकी छवि और क्षेत्रीय सक्रियता का पूरा कच्चा चिट्ठा लखनऊ दफ्तर पहुंच चुका है। सर्वे की यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि कौन दोबारा मैदान में उतरेगा और किसका राजनीतिक वनवास शुरू होगा।
विधानसभा के टिकट पर लटकी है तलवार
बदायूं की सभी छह सीटों पर इस बार टिकट कटने का खौफ साफ देखा जा रहा है। नए दावेदारों की बढ़ती फौज और हिंदू सम्मेलनों के जरिए हुए शक्ति प्रदर्शन ने मौजूदा विधायकों को रक्षात्मक मोड पर ला दिया है। लखनऊ के चक्कर काट रहे माननीय अब विकास कार्यों से ज्यादा अपनी वफादारी साबित करने और अपनी सीट बचाने की जुगत में लगे हैं।

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