टिकट कटने की आहट से बढ़ी विधायकों की बेचैनी, बूथ अध्यक्षों पर डोरे डाल रहे दावेदार
भाजपा के सर्वे और संगठन की कसौटी पर पुराने चेहरों की परीक्षा, नए दावेदारों ने तेज की सक्रियता
बदायूं, बिल्सी और दातागंज में टिकट के लिए जोड़-तोड़ तेज, हर बूथ की रिपोर्ट पर टिकी नजर
देवेश मिश्रा
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के साथ जिले की सियासत में भाजपा के टिकट को लेकर हलचल तेज हो गई है। बदायूं जिले की छह विधानसभा सीटों में वर्तमान में बदायूं सदर, बिल्सी और दातागंज पर भाजपा के विधायक हैं। पार्टी इस बार जिले की सभी छह सीटों पर जीत की रणनीति के साथ संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां कर रही है। इसी बीच टिकट के संभावित दावेदारों ने बूथ स्तर तक अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
भाजपा के भीतर टिकट वितरण को लेकर सर्वे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी एक सर्वे करा चुकी थी और आगे तीन सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारी तय किए जाने की बात सामने आई थी। हर विधानसभा क्षेत्र से कई दावेदार सक्रिय बताए गए थे। ऐसे में मौजूदा विधायकों के साथ-साथ टिकट के नए दावेदार भी संगठन के पदाधिकारियों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
बूथ अध्यक्षों की अचानक बढ़ी पूछ
टिकट की दौड़ में बूथ अध्यक्ष और स्थानीय संगठन पदाधिकारी खासे महत्वपूर्ण हो गए हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संभावित प्रत्याशी अब बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार संपर्क कर रहे हैं। कोई सम्मान और व्यक्तिगत संपर्क के जरिए नजदीकी बढ़ा रहा है तो कहीं कार्यकर्ताओं के बीच उपहार और दूसरे प्रलोभनों की चर्चाएं भी सुनाई दे रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा के अंदर सबसे बड़ा सवाल यह है कि पांच साल के कार्यकाल में किस विधायक ने संगठन और क्षेत्र के लोगों के बीच कितनी सक्रियता दिखाई। टिकट के लिए केवल वर्तमान पद पर्याप्त होगा या क्षेत्रीय पकड़, संगठन में स्वीकार्यता और चुनावी प्रदर्शन जैसे मानकों को भी देखा जाएगा, इस पर दावेदारों की नजर है।
दातागंज से बिल्सी तक स्थानीय मुद्दे बन रहे चुनौती
दातागंज विधानसभा में विधायक राजीव सिंह उर्फ बब्बू भैया 2022 में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे। आधिकारिक विधानसभा रिकॉर्ड में भी उनका नाम दातागंज के भाजपा विधायक के रूप में दर्ज है। अब आगामी चुनाव को लेकर क्षेत्रीय मुद्दों और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर पार्टी संगठन द्वारा उम्मीदवारों का आकलन किए जाने की चर्चा है।
बिल्सी में भी मौजूदा विधायकहरीश शाक्य के सामने स्थानीय स्तर के मुद्दों और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं की कसौटी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जमीन और स्थानीय विवादों को लेकर यदि किसी स्तर पर शिकायतें सामने आती हैं तो उनका राजनीतिक असर कितना है, यह पार्टी के संगठनात्मक आकलन में देखा जा सकता है। हालांकि किसी विधायक के खिलाफ लगाए गए कब्जे या अन्य गंभीर आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती।
सदर सीट पर भी दावेदारों ने बढ़ाई सक्रियता
बदायूं सदर सीट पर भी भाजपा के मौजूदा विधायक के साथ टिकट के संभावित दावेदार सक्रिय बताए जा रहे हैं। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में विधायक की कार्यशैली और क्षेत्र में उपलब्धता को लेकर अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। किसी विधायक पर किसी समुदाय विशेष के लोगों की सिफारिश करने या दूसरे समुदाय की अनदेखी करने जैसे आरोप राजनीतिक तौर पर लगाए जाते हैं, लेकिन ऐसे आरोपों को प्रमाण के बिना तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इसी तरह अपराधियों की सिफारिश करने जैसे गंभीर आरोप भी यदि राजनीतिक मंचों से लगाए जाते हैं तो उनकी पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड या आधिकारिक जांच से ही मानी जा सकती है। फिलहाल इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं है।
सभी छह सीटों पर नजर, नए चेहरों की तलाश
2022 के विधानसभा चुनाव में बदायूं जिले की छह सीटों में भाजपा और सपा ने तीन-तीन सीटें जीती थीं। भाजपा ने बिल्सी, बदायूं और दातागंज में जीत दर्ज की थी, जबकि बिसौली, सहसवान और शेखूपुर सीटें सपा के खाते में गई थीं।
अब भाजपा का लक्ष्य छहों सीटों पर संगठन को मजबूत करना है। यही वजह है कि टिकट के संभावित दावेदार अभी से बूथ स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। पार्टी यदि नए चेहरों को मौका देती है तो मौजूदा विधायकों के लिए संगठन में अपनी स्वीकार्यता और क्षेत्रीय पकड़ साबित करना बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल टिकट का अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है। सर्वे रिपोर्ट, संगठन की फीडबैक, स्थानीय समीकरण और संभावित प्रत्याशियों की चुनावी क्षमता जैसे पहलुओं पर मंथन के बाद ही तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। ऐसे में अभी से किसी विधायक का टिकट कटना तय मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि भाजपा के टिकट की लड़ाई ने बदायूं की तीनों सीटों पर राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।







