वजीरगंज थाने की पुलिस पर गंभीर आरोप, सिपाही का ऑडियो वायरल
307 की धारा हटवाने के नाम पर रुपये लेने की बात का दावा, 60 हजार लेने के बाद काम न होने का आरोप
ऑडियो में सिपाही ने दरोगा पर डाली जिम्मेदारी, कहा-‘दरोगा से दोस्ती करना बेवकूफी’
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। वजीरगंज थाना क्षेत्र की रहरिया चौकी पर तैनात एक सिपाही का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल ऑडियो में एक व्यक्ति से मुकदमे में लगी धारा 307 हटवाने के नाम पर रुपये लिए जाने की बातचीत सामने आने का दावा किया जा रहा है। बातचीत में करीब 60 हजार रुपये लिए जाने के बाद भी संबंधित व्यक्ति का काम न होने की बात कही जा रही है। ऑडियो में सिपाही की ओर से पूरे मामले की जिम्मेदारी दरोगा पर डालने और उससे दोस्ती को लेकर भी टिप्पणी किए जाने का दावा है।
वायरल ऑडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, जागरण मोर्चा वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है। ऑडियो की वास्तविकता, आवाज किसकी है और बातचीत किस प्रकरण से संबंधित है, इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
वायरल हो रहे ऑडियो में कथित रूप से रहरिया चौकी पर तैनात सिपाही मनोज और एक व्यक्ति के बीच बातचीत बताई जा रही है। बातचीत में मुकदमे में लगी धारा 307 को हटाने के संबंध में रकम की चर्चा होने का दावा किया जा रहा है। इसमें करीब 60 हजार रुपये दिए जाने के बावजूद काम नहीं होने की बात सामने आती है। बातचीत के दौरान संबंधित व्यक्ति अपनी नाराजगी जाहिर करता सुनाई देता है।
इसके बाद कथित सिपाही की ओर से मामले में खुद की भूमिका सीमित बताते हुए दरोगा का नाम लिए जाने का दावा है। ऑडियो में सिपाही कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई देता है कि कार्रवाई या मुकदमे से संबंधित निर्णय दरोगा के स्तर से हुआ। इसी दौरान दरोगा से संबंधों को लेकर भी टिप्पणी किए जाने की बात कही जा रही है। वायरल ऑडियो में कथित सिपाही के मुंह से ‘दरोगा से दोस्ती करना बेवकूफी’ जैसी बात सामने आने का दावा किया जा रहा है।
ऑडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है। यदि ऑडियो वास्तविक पाया जाता है तो मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और मुकदमों में धाराओं के संबंध में कथित लेनदेन के आरोपों से जुड़ा होने के कारण गंभीर माना जा सकता है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ऑडियो कब रिकॉर्ड किया गया, इसमें बातचीत करने वाले दोनों पक्ष कौन हैं और जिस मुकदमे की चर्चा हो रही है, उसमें वास्तव में धारा 307 हटाने अथवा बदलने की कोई कार्रवाई हुई या नहीं।
पुलिस विभाग की ओर से वायरल ऑडियो के संबंध में आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई है, इसकी जानकारी भी सामने आना बाकी है। ऐसे में ऑडियो में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप और कथित बातचीत के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। संबंधित सिपाही और दरोगा का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वजीरगंज थाना पुलिस से जुड़े इस कथित ऑडियो ने पुलिस की पारदर्शिता और आम लोगों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर मुकदमों में धाराओं को लेकर किसी प्रकार के लेनदेन के आरोप सामने आने पर विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की जरूरत बढ़ जाती है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारी तय की जा सकती है, जबकि ऑडियो फर्जी अथवा संदर्भ से बाहर पाया जाता है तो उसकी स्थिति भी जांच से स्पष्ट हो सकेगी।
जागरण मोर्चा वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करता है। खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऑडियो और उसमें किए जा रहे दावों के आधार पर प्रकाशित की जा रही है।
सिपाही मनोज कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ऑडियो फेक है। जांच के बाद ही मामला सामने आएगा। हालांकि सिपाही ने यह भी बताया की 2 साल पहले यह मामला बिनावर थाना क्षेत्र में हुआ था।
वर्जन
ऑडियो की गंभीरता से जांच कराई जा रही है जांच में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार किसी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अंशुमान श्रीवास्तव, सीओ बिसौली





