सरकारी अस्पताल बनाम प्राइवेट सिंडिकेट
सरकारी अस्पतालों से मोहभंग, निजी नर्सिंग होम में मरीजों की बोली: संविदा डॉक्टरों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल।
हरिओम बाजपेई
पीलीभीत। सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में व्याप्त अव्यवस्था और संविदा पर तैनात कुछ चिकित्सकों की कथित लापर वाही के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनहित में यह बात सामने आ रही है किसरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं न होने या डॉक्टरों द्वारा रुचि न लेने के कारण मरीजों को खुलेआम निजी अस्पतालों का रास्ता दिखाया जा रहा है। निजी अस्पतालों में रेफर करने का खेल: आरोप हैं कि सरकारी ड्यूटी पर तैनात कुछ संविदा चिकित्सक मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में भेज रहे हैं।
आर्थिक शोषण और शोहरत का धंधा: सरकारी अस्पतालों में तय मानदेय और सीमित संसाधनों के कारण कुछ चिकित्सक निजी क्लीनिकों और अस्पतालों से सांठगांठ कर रहे हैं। जहां मरीजों से मनमाना शुल्क वसूलकर मोटी कमाई के साथ-साथ निजी साख (शोहरत) बनाई जा रही है। सरकारी अस्पताल में मुफ्त या कम खर्च में इलाज की आस लेकर आने वाले गरीब मरीज निजी अस्पतालों के भारी-भरकम बिलों के तले दबकर कर्जदार होने को मजबूर हैं। ड्यूटी के दौरान निजी अस्पतालों के लिए दलाली या रेफरल करने वाले डॉक्टरों की बायोमेट्रिक और औचक निरीक्षण के जरिए निगरानी की जाए।
सख्त कानूनी और अनुशासना त्मक कार्रवाई: सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने वाले संविदा और स्थायी चिकित्सकों की सेवा तत्काल समाप्त की जाए और आपराधिक मामला दर्ज हो। सरकारी अस्पतालों में पारदर्शी हेल्पलाइन नंबर और शिकायत पेटी लगाई जाए, जिससे पीड़ित मरीज बिना किसी डर के सीधे प्रशासन से शिकायत दर्ज करा सकें।स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि आम नागरिक का मूलभूत अधिकार है। सरकारी व्यवस्था को दुरुस्त कर इस अवैध रेफरल सिंडिकेट पर नकेल कसना बेहद जरूरी है।।
इसेट
आज एक ऐसा ही मामला देखने को स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज संबद्ध जिला चिकित्सालय परिसर में मिला। मरीज दर्द से चिल्लाता रहा और डॉक्टर के आने का करता रहा इंतजार लेकिन अफसोस कुछ देर बाद पता चला डॉक्टर साहब छुट्टी पर है। लेकिन डॉक्टर साहब मजबूर थे आज क्योंकि उन्हें एक ऑपरेशन एक निजी नर्सिंग होम में करना था।




