सीकरी में आंबेडकर की मूर्ति खंडित मिलने से तनाव, ग्रामीणों का प्रदर्शन
सरकारी जमीन पर रात में बिना अनुमति लगाई गई थी मूर्ति
सुबह चबूतरे से नीचे टूटी मिली, कई थानों की पुलिस तैनात, पीएसी बुलाई गई
आसफपुर, औरछी। क्षेत्र के सीकरी गांव में मंगलवार सुबह डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति खंडित मिलने से तनाव फैल गया। ग्रामीणों के मुताबिक, सोमवार रात कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर बिना अनुमति मूर्ति स्थापित कर दी थी। मंगलवार सुबह मूर्ति चबूतरे से नीचे टूटी पड़ी मिली। जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीण दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और नई मूर्ति स्थापित कराने की मांग पर अड़े रहे।
स्थिति की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसडीएम प्रियंका सिंह, एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया और सीओ अंशुमान श्रीवास्तव ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। फैजगंज बेहटा थाना पुलिस के साथ आसपास के कई थानों का पुलिस बल भी गांव में तैनात किया गया। स्थिति को देखते हुए बाद में पीएसी भी बुला ली गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि सोमवार रात सरकारी जमीन पर बिना प्रशासनिक अनुमति के आंबेडकर की मूर्ति स्थापित की गई थी। इसके कुछ घंटे बाद अज्ञात लोगों ने मूर्ति को चबूतरे से उखाड़कर नीचे गिरा दिया और वह क्षतिग्रस्त हो गई। सुबह जब ग्रामीणों ने मूर्ति को टूटी अवस्था में देखा तो उनमें आक्रोश फैल गया। इसके बाद ग्रामीण मौके पर एकत्र होकर धरने पर बैठ गए।
ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मूर्ति खंडित करने वालों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जाए और मौके पर नई मूर्ति स्थापित कराई जाए। ग्रामीणों के प्रदर्शन को देखते हुए अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया। हालांकि, देर शाम तक पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। सबसे बड़ा सवाल यह भी बना हुआ है कि सरकारी जमीन पर बिना अनुमति मूर्ति किसने स्थापित की थी और इसकी जानकारी प्रशासन को पहले क्यों नहीं हुई।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर बिना अनुमति किसी प्रकार का निर्माण या प्रतिमा स्थापित करना नियमों के विपरीत है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखना है। तनाव को देखते हुए पुलिस बल लगातार तैनात रहा और अधिकारियों ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। देर शाम तक ग्रामीण धरने पर बैठे रहे और कार्रवाई की मांग करते रहे।





