
जागरण मोर्चा
बीसलपुर|दशकों से होली पर धमार बजाकर गमी निकालने की एक अनूठी परंपरा चली आ रही है,जो बदस्तूर आज भी कायम है।भले ही आज की युवा पीढ़ी इसको भुलाने में लगी हो।परन्तु ग्रामीण अंचल के बुजुर्गों द्वारा आज भी यह परंपरा बखूबी निभाई जा रही है। इसी परंपरा को बरकरार रखने के लिए ग्राम पंचायत जादौपुर नथा के प्रधान ने धमार बजाने वाले लोगों को 5000 की धनराशि देकर पुरस्कृत किया है।
बताते हैं जिस परिवार में किसी की मौत हुई है,वहां गमी हो गयी।और होली तक परिवार में सारे मंगल कार्य, धार्मिक शादी विवाह जैसे कार्य बंद हो जाते हैं।वहीं होली पर उन दरवाजाें पर जाकर धमार बजती है,तो धमार के ढोल बजने के साथ ही उस घर में मंगल कार्य पुनःशुरू हो जाते है।
गांव देहात के अलावा नगर में भी यह पुरानी रीति-रिवाज होली पर आज भी जारी है।आधुनिकता के दौर में फाग के बोल व हुडदंग मचातीं युवाओं की टोलियां अब सिर्फ नाम मात्र ही दिखाई पड़ती है।लेकिन बुजुर्गों की बदौलत पुरानी परंपराओं में कोई कमी नहीं आई है।कुछ युवा भी सनातन पंरपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।बुजुर्गों की टोली आज भी गांवों से लेकर आस-पास गांवों में जाकर गमों को दूर कर खुशियों कि धमार उसी उत्साह के साथ बजा रहे है। उधर ग्राम पंचायत जादौपुर नथा के प्रधान संजय पांडेय ने सीताराम, धीरज शर्मा, डॉ हिमांशु, हरिओम प्रजापति की मौजूदगी में गांव के उन सभी लोगों को पुरस्कृत किया जो धमार बजाने में अग्रणी रहते हैं।
आज की पीढ़ी पूछे आखिर क्या है धमार
धमार का चलन दशकों से चला आ रहा है,लेकिन आज की युवा पीढ़ी के सामने एक सवाल जरूर होगा,की आखिर धमार है क्या..!
बता दें की धमार गांवों में एक विशेष गायन शैली कही जाती है।जो गमी की होली पर दरवाजे-दरवाजे होरियारे हाथ मे खँजड़ी,मंजीरा,मोच्छन एवं मोरपंखी लिए ढोल बजाते नाचते गाते पहुंचते है।हर वर्ष बसंत पंचमी से धमार बजना शुरू हो जाती है,जो चैत पूर्ण मासी तक होरियारे गांव में होली बाद भी रात को गाते-बजाते रहते है।बुजुर्गों के साथ युवाओं की मौजूदगी इस परंपरा को आगे भी खत्म न होने का अहसास दिलाती है।धमार में शामिल कुछ लोग लेडीज भेषभूषा बनाकर नृत्य और हुड़दंग भी करते हैं।जिसको गांव की भाषा मे स्वांग कहा जाता है।पुरानी परंपरा के अनुसार किसी के निधन के बाद जब यह धमार उनके दरवाजे पर बजती है, तो शुभ कार्य भी इसी दिन से होना शुरू हो जाते है।दरवाजे पर धमार में शामिल लोगों की आवभगत की जाती है।इस दौरान उन्हें नृत्य के दौरान गुझिया,मिठाई,लड्डुओं के साथ शराब भी बांटी जाती है।






