14 साल बाद भी अधूरा राजकीय मेडिकल कॉलेज, अस्थायी मान्यता के सहारे चल रही पढ़ाई
546 करोड़ की परियोजना पर सवाल, निर्माण निगम की लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती से छात्रों का भविष्य अधर में
जागरण मोर्चा कार्यालय
बदायूं। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और स्थानीय छात्रों को उच्च चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 546 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य 14 वर्षों बाद भी अधूरा पड़ा है। लंबे समय से चल रही यह परियोजना अब न केवल प्रशासनिक उदासीनता की प्रतीक बन गई है, बल्कि इसकी अस्थायी मान्यता पर भी लगातार संकट मंडरा रहा है।
मेडिकल कॉलेज फिलहाल अस्थायी मान्यता के सहारे संचालित हो रहा है, जिससे यहां अध्ययनरत छात्रों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। नियमानुसार मेडिकल कॉलेज में सभी आवश्यक भवन, उपकरण और सुविधाएं पूर्ण रूप से उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण कई विभाग अभी तक पूरी तरह स्थापित नहीं हो सके हैं। इससे न केवल पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि मान्यता निरस्त होने का खतरा भी बना रहता है।
सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे निर्माण निगम की लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली के चलते परियोजना लगातार विलंब का शिकार हो रही है। कई बार समय सीमा तय होने के बावजूद कार्य पूरा नहीं हो सका। वहीं, कॉलेज प्रशासन पर भी समयबद्ध कार्य कराने में सुस्ती बरतने के आरोप लग रहे हैं। जिम्मेदार विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा सीधे तौर पर छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे छात्र और उनके अभिभावक इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि अधूरी सुविधाओं के बीच पढ़ाई करना मजबूरी बन गया है। प्रयोगशालाओं, हॉस्टल और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण छात्रों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ तो भविष्य में उनकी डिग्री और करियर पर भी असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इतनी बड़ी लागत से बन रहे इस मेडिकल कॉलेज का समय पर पूरा न होना सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए यह कॉलेज बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी धीमी प्रगति से क्षेत्रवासियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर प्रगति अभी भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रही है।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक यह मेडिकल कॉलेज पूर्ण रूप से तैयार होकर छात्रों और आमजन को बेहतर सुविधाएं प्रदान कर पाता है। फिलहाल, 14 साल बाद भी अधूरा पड़ा यह प्रोजेक्ट व्यवस्था की धीमी रफ्तार की कहानी बयां कर रहा है।
वर्जन
निर्माण कार्य अधूरा रहने से व्यवस्थाएं खराब है। कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द व्यवस्था को ठीक कराया जाए।निर्माण निगम ने पूरी तरह से काम बंद कर दिया है। शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। शासन स्तर से ही इसमें कोई कार्रवाई की जा सकेगी।डॉ. शिवकुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज





